MP के सभी नगरीय निकायों में बनाए जाएंगे ‘गीता भवन’, सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा “युवा पीढ़ी को गीता के निष्काम कर्म और भारतीय मूल्यों से जोड़ेंगे”
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर मध्यप्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ‘गीता भवन’ बनाए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से प्रदेश में दार्शनिक और आध्यात्मिक वातावरण विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों को सर्वसुविधायुक्त बनाया जाएगा। इन गीता भवनों को
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर मध्यप्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ‘गीता भवन’ बनाए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से प्रदेश में दार्शनिक और आध्यात्मिक वातावरण विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों को सर्वसुविधायुक्त बनाया जाएगा।
इन गीता भवनों को बनाने का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्म योग, भारतीय मूल्यों और सनातन दर्शन से जोड़ना है। साथ ही शोधार्थियों, छात्रों और समाज के लिए भारतीय दर्शन, कला, साहित्य एवं आध्यात्मिक विमर्श का एक आधुनिक मंच उपलब्ध कराना है।
प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में बनेंगे गीता भवन
इंदौर और जबलपुर में बने गीता भवन की सफलता को आधार बनाते हुए अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को विस्तार देने के लिए ‘गीता भवन’ परियोजना को अब वृहद स्वरूप दिया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के सभी 413 नगरीय निकायों में गीता भवन निर्माण की योजना तैयार की गई है। इस योजना के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना बनाई गई है जिसमें वर्ष 2026-27 के लिए साठ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में भारतीय दर्शन, कला और साहित्यिक विमर्श के लिए आधुनिक अवसंरचना तैयार करना है।
चार शहरों में ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स को तकनीकी स्वीकृति मिली
परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में विभाग ने चार शहरों में ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स को तकनीकी स्वीकृति दे दी है। इनमें रीवा में 5 करोड़ रुपये, छिंदवाड़ा में 2.5 करोड़ रुपये, कटनी में 2.4 करोड़ रुपये और खंडवा में 2 करोड़ रुपये की लागत से गीता भवन बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 6 नगर निगमों सहित 100 नगर पालिकाओं में ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है और उनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बाकी 313 नगरीय निकायों में भी भूमि चिन्हांकन का काम पूरा हो चुका है और जिला कलेक्टरों के माध्यम से आवंटन की प्रक्रिया जारी है।