मध्य प्रदेश NH-46 बरेठा घाट पर चार साल बाद निर्माण का रास्ता साफ, टाइगर कॉरिडोर के कारण रुके 21 KM फोर-लेन प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
भोपाल: मध्य प्रदेश के सबसे अहम आर्थिक गलियारों में से एक, नेशनल हाईवे-46 (NH-46) पर पिछले ढाई साल से अटके निर्माण कार्य के फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। ग्वालियर को बैतूल से जोड़ने वाले इस हाईवे के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से, बरेठा घाट सेक्शन, पर अब जल्द ही काम शुरू हो
भोपाल: मध्य प्रदेश के सबसे अहम आर्थिक गलियारों में से एक, नेशनल हाईवे-46 (NH-46) पर पिछले ढाई साल से अटके निर्माण कार्य के फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। ग्वालियर को बैतूल से जोड़ने वाले इस हाईवे के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से, बरेठा घाट सेक्शन, पर अब जल्द ही काम शुरू हो सकेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस प्रोजेक्ट के लिए वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी पर्यावरणीय स्वीकृतियां हासिल कर ली हैं।
यह प्रोजेक्ट अप्रैल 2022 से कानूनी अड़चनों में फंसा था, जब हाईकोर्ट ने इस क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगा दी थी। दरअसल, यह पूरा इलाका एक संवेदनशील टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर और घने जंगल क्षेत्र का हिस्सा है, जिसके कारण वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंताएं जताई गई थीं। अब सभी मंजूरियां मिलने के बाद केवल हाईकोर्ट के औपचारिक आदेश का इंतजार है, जिसके मिलते ही लगभग 21 किलोमीटर लंबे इस खतरनाक रास्ते को फोर-लेन में बदलने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
क्यों खतरनाक है बरेठा घाट का मौजूदा रास्ता?
वर्तमान में बरेठा घाट का यह सेक्शन महज दो लेन का है, जो तीखे मोड़ों, गहरी ढलानों और खराब दृश्यता के कारण हादसों का केंद्र बना हुआ है। सरकारी रिकॉर्ड्स के अनुसार, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस छोटे से हिस्से में 51 गंभीर सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 18 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए। इस मार्ग पर लगातार बने रहने वाले खतरे को देखते हुए इसे चौड़ा करना बेहद जरूरी माना जा रहा था।
नई परियोजना में क्या होगा खास?
नई योजना के तहत इस 20.9 किलोमीटर के हिस्से को आधुनिक फोर-लेन हाईवे में तब्दील किया जाएगा। सड़क के घुमावदार और खतरनाक मोड़ों को सीधा करके इसे सुरक्षित बनाया जाएगा। परियोजना के तहत कई पुल, अंडरब्रिज और ओवरब्रिज भी बनाए जाएंगे ताकि ट्रैफिक बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चल सके और ब्लैक स्पॉट खत्म हों।
वन्यजीव संरक्षण पर विशेष ध्यान
चूंकि यह क्षेत्र बाघों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जंगल से गुजरने वाले जानवरों के लिए सड़क के नीचे और ऊपर कई एनिमल अंडरपास और ओवरपास का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा, सड़क के दोनों ओर क्रैश बैरियर, चेतावनी साइन बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपाय भी लगाए जाएंगे ताकि इंसान और जानवर दोनों सुरक्षित रहें।
इस सेक्शन का निर्माण पूरा होने के बाद ग्वालियर से बैतूल और आगे महाराष्ट्र तक का सफर न केवल तेज होगा, बल्कि बेहद सुरक्षित भी हो जाएगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।