ओडिशा पुलिस ने किसान नेता राकेश टिकैत को किया गिरफ्तार, यूपी में भाकियू कार्यकर्ताओं में आक्रोश, बनी तनाव की स्थिति

किसान नेता राकेश टिकैत को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और देश के एक प्रमुख किसान चेहरा टिकैत को उस समय हिरासत में लिया गया जब वे राज्य में चल रहे एक बड़े किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए भुवनेश्वर

Mar 30, 2026 - 21:30
ओडिशा पुलिस ने किसान नेता राकेश टिकैत को किया गिरफ्तार, यूपी में भाकियू कार्यकर्ताओं में आक्रोश, बनी तनाव की स्थिति

किसान नेता राकेश टिकैत को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और देश के एक प्रमुख किसान चेहरा टिकैत को उस समय हिरासत में लिया गया जब वे राज्य में चल रहे एक बड़े किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए भुवनेश्वर पहुंचे थे. पुलिस की यह कार्रवाई किसानों की एक प्रस्तावित सभा शुरू होने से ठीक पहले हुई, जिसने किसानों और उनके समर्थकों में भारी रोष पैदा कर दिया है.

ओडिशा के किसान अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समर्थन में 22 मार्च 2026 से एक लंबा पैदल मार्च करते हुए राजधानी भुवनेश्वर पहुंचे थे. इस विशाल किसान मार्च का उद्देश्य अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना और एक सार्वजनिक सभा के माध्यम से जनसमर्थन जुटाना था. राकेश टिकैत भी इसी महत्वपूर्ण सभा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे, ताकि किसानों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिल सके.

राकेश टिकैत समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया

हालांकि, सभा शुरू होने से पहले ही स्थानीय पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए राकेश टिकैत और उनके साथ मौजूद कई अन्य किसान नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. यह कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि मौके पर मौजूद किसानों को संभलने का मौका भी नहीं मिला. प्रदर्शनकारी किसान अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से मार्च कर रहे थे और सभा की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने किसी भी तरह की सभा को होने से पहले ही रोक दिया.

इस अप्रत्याशित कार्रवाई के बाद किसानों और उनके समर्थकों में गुस्सा और नाराजगी साफ नजर आ रही है. किसानों का आरोप है कि यह कदम उनकी लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास है. उनका कहना है कि सरकार किसानों की जायज मांगों पर ध्यान देने के बजाय दमनकारी नीतियों का सहारा ले रही है, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है.

राकेश टिकैत ने अपनी हिरासत का वीडियो किया साझा

राकेश टिकैत ने अपनी हिरासत का एक वीडियो खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है. इस वीडियो में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस ने यह कार्रवाई राज्य सरकार के सीधे निर्देश पर की है. टिकैत ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर किसानों की सभा में पहुंचने से पहले ही रोक लिया गया, ताकि किसान अपने मुद्दों को लोगों के सामने न रख सकें और आंदोलन को कमजोर किया जा सके. उन्होंने इसे किसानों के हक की आवाज को कुचलने की कोशिश बताया.

किसान नेता राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की खबर बिजली की गति से देशभर के किसान संगठनों में फैल गई. इस खबर के फैलते ही किसान संगठनों में तुरंत हलचल मच गई और बड़े पैमाने पर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं. इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर किसानों के मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है.

यूपी में भाकियू कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन

खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों में इस घटना को लेकर गहरा गुस्सा देखने को मिला. पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जो भाकियू और राकेश टिकैत का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, वहां के किसान तुरंत सड़कों पर उतर आए. मेरठ और आसपास के कई जिलों में भाकियू कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए. मेरठ जिले के मवाना क्षेत्र में भाकियू के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर धरने पर बैठ गए.

इन प्रदर्शनकारी किसानों और भाकियू कार्यकर्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनके नेता राकेश टिकैत को सम्मानपूर्वक रिहा नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार ने किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश की, तो इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा और आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा. यह चेतावनी ओडिशा से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक किसानों के बीच फैल रहे गुस्से को दर्शाती है.

किसान नेताओं का मानना है कि इस तरह की गिरफ्तारियां और दमनकारी कदम किसानों के मनोबल को तोड़ने में सफल नहीं होंगे, बल्कि यह आंदोलन को और मजबूत करेंगे. उनका कहना है कि वे अपनी मांगों, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी और अन्य कृषि संबंधी मुद्दे शामिल हैं, पर अडिग रहेंगे. वहीं, पुलिस प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक आवश्यक कदम बताया है, हालांकि किसानों का तर्क है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और उसमें किसी भी तरह की अशांति की कोई संभावना नहीं थी.

किसान नेताओं की रिहाई को लेकर बनी तनाव की स्थिति

फिलहाल, राकेश टिकैत और अन्य हिरासत में लिए गए किसान नेताओं की रिहाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है. किसान संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने और टिकैत की तत्काल व सम्मानजनक रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की है. इस घटना ने देश में किसानों के मुद्दों पर चल रही बहस को एक नई दिशा दे दी है और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश में कृषि नीतियों और किसानों की स्थिति को लेकर पहले से ही गंभीर चर्चाएं चल रही हैं. राकेश टिकैत की गिरफ्तारी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. किसान संगठनों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी भी दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है.