भोपाल हमीदिया अस्पताल फायरिंग मामले में चश्मदीद का बड़ा दावा, गोलियां चलती रहीं और पुलिसकर्मी अंदर बैठे रहे, जानें पूरा मामला
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी हमीदिया अस्पताल में शनिवार सुबह गैंगवार ने सनसनी फैला दी। अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर एक्टिवा सवार तीन बदमाशों ने एक व्यक्ति पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और फरार हो गए। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक चश्मदीद
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी हमीदिया अस्पताल में शनिवार सुबह गैंगवार ने सनसनी फैला दी। अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर एक्टिवा सवार तीन बदमाशों ने एक व्यक्ति पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और फरार हो गए। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक चश्मदीद ने दावा किया है कि जिस वक्त बाहर गोलियां चल रही थीं, पुलिसकर्मी अंदर ही बैठे रहे और उन्होंने बाहर निकलने की हिम्मत नहीं की।
यह घटना सुबह करीब 6:30 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शी हेमराज के अनुसार, वह अपनी पत्नी के साथ इमरजेंसी गेट के पास खड़े थे, तभी एक्टिवा पर तीन युवक आए। उनमें से दो उतरे, जिनके हाथों में पिस्टल और चाकू थे। उन्होंने गेट के पास खड़े एक व्यक्ति पर करीब तीन राउंड फायरिंग की और गालियां देते हुए फरार हो गए। हेमराज ने बताया, “घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हमने कभी नहीं सोचा था कि भोपाल में ऐसी बेखौफ वारदात हो सकती है।”
पुरानी गैंगवार और वर्चस्व की लड़ाई
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह हमला शहर में पुरानी गैंगवार का नतीजा है। निशाना बनाया गया व्यक्ति हिस्ट्रीशीटर बदमाश लल्लू रईस था, जो अपने घायल बेटे इमरान को लेकर अस्पताल पहुंचा था। दरअसल, अस्पताल में फायरिंग से पहले लल्लू के शंकर गार्डन स्थित घर पर भी हमला हुआ था। आरोपी इमरान का पीछा करते हुए घर तक पहुंच गए थे और उस पर गोलियां चलाई थीं। इसका एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक, लल्लू रईस के बेटे इमरान ने करीब दो साल पहले हत्याकांड में जेल से छूटे बदमाश शादाब कुरैशी उर्फ ‘गेट’ के भाई शाजेब पर जानलेवा हमला किया था। माना जा रहा है कि शनिवार की वारदात उसी का बदला लेने के लिए की गई थी। घायल इमरान को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। चश्मदीद के अलावा खुद लल्लू रईस ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि घटना के वक्त अशोका गार्डन पुलिस इमरजेंसी वार्ड में मौजूद थी, क्योंकि वे उसके घायल बेटे का मेडिकल परीक्षण कराने लाए थे। रईस ने दावा किया कि फायरिंग के बाद पुलिस उसे छोड़कर चली गई और अस्पताल के गार्ड्स ने उसकी जान बचाई।
“साहब, बाहर गोलियां चलती रहीं, पुलिसकर्मी अंदर बैठे रहे। उन्होंने बाहर निकलने की हिम्मत नहीं की। आरोपी महज डेढ़-दो मिनट के भीतर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।” — हेमराज, चश्मदीद
सुरक्षा को लेकर पुलिस का तर्क
आरोपों पर कोहेफिजा थाने के प्रभारी केजी शुक्ला ने कहा कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था रहती है और चार्ली के जवान परिसर में गश्त करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी अस्पताल के गार्ड्स की होती है। उन्होंने बताया कि फायरिंग की घटना में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपियों की तलाश के लिए क्राइम ब्रांच समेत कई टीमें दबिश दे रही हैं। लल्लू रईस का यह भी आरोप है कि आरोपी जुआ-सट्टे का अवैध कारोबार चलाते हैं और वह उनके कारनामों को उजागर करता है, इसी वजह से वे उसकी हत्या करना चाहते हैं।