MP कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा, कुणाल चौधरी ने MSP, बोनस और कर्ज पर उठाए सवाल, आंदोलन की चेतावनी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने इस साल “कृषि कल्याण वर्ष” मना रही है लेकिन उसकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है। कांग्रेस नेता
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने इस साल “कृषि कल्याण वर्ष” मना रही है लेकिन उसकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जो अब केंद्रीय कृषि मंत्री हैं…वो किसानों के साथ लगातार अन्याय कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में जबसे बीजेपी की सरकार आई है..देश का किसान लगातार कर्ज में डूबता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां किसानों के हित में नहीं बल्कि उनके शोषण का माध्यम बन गई हैं।
MSP पर खरीदी में गड़बड़ी का आरोप
कुणाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश में किसानों की फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी सही तरीके से नहीं हो रही है। उन्होंनेआरोप लगाया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी में अनियमितताएं हो रही हैं। सरकार द्वारा 575 प्रति क्विंटल बोनस देने के वादे के बावजूद सिर्फ 40 बढ़ाने को उन्होंने “किसानों के साथ धोखा” बताया। उन्होंने मांग की कि एमएसपी पर पूरा 575 बोनस तुरंत लागू किया जाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि किसानों को “शून्य प्रतिशत ब्याज” के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में वे 16 से 20 प्रतिशत तक ब्याज के बोझ में फंस रहे हैं। उन्होंने इसे किसानों को कर्ज के जाल में धकेलने वाली नीति बताया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के नाम पर कर्ज लेकर उन्हें ठगा जा रहा है और व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव है।
खरीदी तारीख में बदलाव पर जताई नाराजगी
पूर्व विधायक ने कहा कि पहले गेहूं खरीदी 16 मार्च से शुरू करने की घोषणा की गई थी जिसे अब बढ़ाकर 1 अप्रैल कर दिया गया है। इससे किसानों को परेशानी हो रही है। उन्होंने खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 अप्रैल तक करने की मांग की ताकि किसानों को पर्याप्त समय मिल सके। राज्य सरकार द्वारा घोषित “कृषि कल्याण वर्ष” पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह किसान शोषण वर्ष बन गया है, जहां किसानों को राहत देने के बजाय लूटा जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय हालात का किसानों पर असर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड डील और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विदेशी कृषि उत्पादों के आयात से मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों के दाम प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से डीजल महंगा होगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि उर्वरकों के लिए भारत अभी आयात पर निर्भर है और गैस आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है, जिससे आने वाले खरीफ सीजन में खाद संकट की आशंका है।
ये मांगें रखी, आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेता ने सरकार के सामने मांग रखी है कि एमएसपी पर 575 प्रति क्विंटल बोनस लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि फसलों की खरीदी तुरंत शुरू हो और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए। किसानों को कर्ज और ब्याज के जाल से राहत मिले। उन्होंने मांग की कि अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में किसानों के हित सुरक्षित किए जाएं और ऋण किस्त जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए। कुणाल चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों के मुद्दों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो कांग्रेस प्रदेशभर में उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि किसान आर्थिक संकट, कर्ज और घटते दामों के बीच संघर्ष कर रहा है और कांग्रेस उसकी लड़ाई को मजबूती से उठाएगी।