राघव चड्ढा ने राज्यसभा में क्यों कहा “इस नियम के लागू होने से ज्यादा लोग करेंगे शादी”, जानिए क्या है जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न का प्रस्ताव

आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को राज्यसभा में बैंकों द्वारा लगाई जाने वाली मिनिमम बैलेंस पेनल्टी को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया। सांसद ने कहा कि यह पेनल्टी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालती है, और यह उन्हें उनकी गरीबी के लिए “दंडित” करने

Mar 17, 2026 - 16:30
राघव चड्ढा ने राज्यसभा में क्यों कहा “इस नियम के लागू होने से ज्यादा लोग करेंगे शादी”, जानिए क्या है जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न का प्रस्ताव

आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को राज्यसभा में बैंकों द्वारा लगाई जाने वाली मिनिमम बैलेंस पेनल्टी को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया। सांसद ने कहा कि यह पेनल्टी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालती है, और यह उन्हें उनकी गरीबी के लिए “दंडित” करने जैसा है।

इसी दौरान उन्होंने एक और अहम वित्तीय मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से शादीशुदा जोड़ों को ‘जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न’ फाइल करने का विकल्प देने का आग्रह किया। आप सांसद का कहना है कि वर्तमान टैक्स प्रणाली उन परिवारों के लिए अनुचित है जहां पति-पत्नी में से सिर्फ एक ही कमाता है या दोनों की आय में बड़ा अंतर है। उनका कहना है कि अगर जॉइंट फाइलिंग की सुविधा दी जाए तो मध्यमवर्गीय परिवारों को टैक्स में वास्तविक राहत मिल सकती है।

मिनिमम बैलेंस पेनल्टी नियम को बदलने की मांग

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में बैंकिंग सिस्टम के मिनिमम बैलेंस पेनल्टी नियम को बदलने की मांग करते हुए पिछले तीन वित्तीय वर्षों में बैंकों ने इस के नाम पर कुल 19,000 करोड़ की पेनल्टी वसूल की है। उन्होंने इसे “गरीबी पर टैक्स” या “गरीबी की सजा” करार दिया और आरोप लगाया कि यह चार्ज मुख्य रूप से किसानों, पेंशनरों, दिहाड़ी मजदूरों और निम्न-आय वर्ग के लोगों पर पड़ता है, जिनके लिए 1,000 से ₹10,000 तक का न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि अमीर खाताधारकों पर इसका असर कम या न के बराबर होता है। उन्होंने राज्यसभा में प्रस्ताव रखा कि मिनिमम बैलेंस पेनल्टी को पूरी तरह खत्म किया जाए, ताकि बैंकिंग सिस्टम गरीबों की जेब से चुपचाप पैसे न काटे। साथ ही उन्होंने अन्य हिंडन चार्ज जैसे एक्स्ट्रा एटीएम यूज, इनएक्टिविटी फीस, एसएमएस अलर्ट चार्ज आदि पर भी ध्यान दिलाया।

विवाहित जोड़ों को जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग का विकल्प देने की मांग की

इसी के साथ उन्होंने केंद्र सरकार से शादीशुदा जोड़ों के लिए जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग का विकल्प देने की भी मांग की है। राघव चड्ढा ने कहा कि मौजूदा टैक्स नियम उन परिवारों के साथ अनुचित हैं जहां पति-पत्नी में से कोई एक ही कमाता है या दोनों की इनकम में बहुत अंतर है। सांसद ने इसे समझाने के लिए दो उदाहरण पेश किए। उन्होंने बताया कि एक परिवार में पति-पत्नी दोनों 10-10 लाख रुपये कमाते हैं, यानी कुल 20 लाख रुपये। नियमों के तहत 12 लाख रुपये तक की आय टैक्स मुक्त होने के कारण इस परिवार को टैक्स नहीं देना पड़ेगा। वहीं दूसरे परिवार में एक ही सदस्य 20 लाख रुपये कमाता है, जबकि दूसरा घर और बच्चों की देखभाल करता है। इन दोनों परिवारों में कुल आय वही 20 लाख रुपये होने के बावजूद इस परिवार को लगभग 1.92 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता है। आप नेता ने सवाल उठाया कि जब घर और बजट साझा हैं तो फिर टैक्स प्रणाली उन्हें अलग-अलग क्यों देखती है।

राघव चड्ढा ने कहा “ज्यादा लोग करेंगे शादी”

राघव चड्ढा ने कहा कि अगर इनकम टैक्स में जॉइंट फाइलिंग की सुविधा मिलती है तो दूसरे परिवार की की कुल आय दोनों में बांटी जा सकती है। इससे दोनों की व्यक्तिगत छूट सीमा में आय आएगी और उन्हें भी टैक्स में वही राहत मिलेगी जो पहले परिवार को मिलती है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी यह बात साझा की और बताया कि मौजूदा सिस्टम परिवार के बजाय सिर्फ व्यक्तिगत आधार पर गणना करता है, जिससे घरेलू जिम्मेदारियों वाले परिवारों को अनुचित बोझ झेलना पड़ता है। आप सांसद ने मजाकिया लहजे में कहा कि अगर जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग की सुविधा मिलती है जो ज्यादा लोग शादी करेंगे ताकि वो टैक्स सेविंग का लाभ उठा सकें।