70% H-1B याचिकाएं भारतीयों की, अब PERM पर कसेगा शिकंजा? जानिए क्या बदलेगा

अमेरिका में H-1B से लेकर ग्रीन कार्ड तक का सफर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए और मुश्किल हो सकता है। रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने अमेरिकी श्रम विभाग से PERM प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग की है। प्रस्ताव में अमेरिकी उम्मीदवारों की भर्ती, इंटरव्यू और रिजेक्शन का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव है।

Aug 8, 2026 - 14:30
70% H-1B याचिकाएं भारतीयों की, अब PERM पर कसेगा शिकंजा? जानिए क्या बदलेगा

New Delhi: अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए एक नई चिंता सामने आई है। H-1B वीजा के बाद ग्रीन कार्ड हासिल करने की राह पहले ही लंबी और जटिल मानी जाती है, अब PERM प्रक्रिया में बदलाव की मांग ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने अमेरिकी श्रम विभाग से PERM यानी Program Electronic Review Management प्रक्रिया के नियमों को बदलने की मांग की है।

प्रस्ताव में अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी का वास्तविक मौका देने के लिए कंपनियों पर कई नई जिम्मेदारियां डालने की बात कही गई है। इनमें हर अमेरिकी आवेदक का रिकॉर्ड रखना, उम्मीदवार को रिजेक्ट करने की वजह दर्ज करना और योग्य अमेरिकी उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेना जैसे प्रावधान शामिल हैं। अगर इन प्रस्तावों को लागू किया जाता है तो विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने वाली कंपनियों के लिए प्रक्रिया और ज्यादा सख्त हो सकती है।

क्या है PERM और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

PERM प्रक्रिया अमेरिकी कंपनियों के लिए उस समय महत्वपूर्ण होती है, जब वे किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी देने और उसके लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहती हैं। आसान भाषा में समझें तो कई मामलों में PERM ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण होता है।

सीनेटर ने श्रम विभाग को क्यों लिखा पत्र?

एरिक श्मिट ने कार्यवाहक श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग को पत्र लिखकर PERM प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की मांग की है। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था का इस्तेमाल कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने के लिए कर सकती हैं। उन्होंने PERM नियमों में व्यापक बदलाव के साथ-साथ ऑडिट, संदिग्ध धोखाधड़ी और PERM आवेदकों के OPT तथा H-1B वीजा के पिछले इस्तेमाल से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग भी की है।

1986 के बाद सबसे बड़ा बदलाव? H-1B वीजा होल्डर्स के लिए अमेरिका में नया बिल, भारतीयों को मिल सकती है बड़ी राहत

हालांकि, एक महत्वपूर्ण बात यह है कि श्मिट ने अपने पत्र में भारत को निशाना नहीं बनाया है। उन्होंने H-1B या ग्रीन कार्ड को सीधे खत्म करने या मौजूदा वीजा रद्द करने की मांग भी नहीं की है। उनका फोकस मुख्य रूप से PERM भर्ती प्रक्रिया को सख्त और पारदर्शी बनाने पर है।

70 फीसदी H-1B याचिकाएं भारतीयों की

इस प्रस्ताव को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स में चर्चा इसलिए ज्यादा है क्योंकि अमेरिका के H-1B कार्यक्रम में भारतीय नागरिकों की बड़ी हिस्सेदारी है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में करीब 70 फीसदी भारतीयों की थीं।

कई भारतीय छात्र पहले अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर पढ़ाई करते हैं। इसके बाद वे OPT यानी Optional Practical Training के जरिए काम का अनुभव हासिल करते हैं। आगे चलकर उन्हें H-1B के जरिए नौकरी मिल सकती है। इसके बाद कई मामलों में नियोक्ता उनके स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया शुरू करता है।

अमेरिकी उम्मीदवारों का रिकॉर्ड रखना होगा?

एरिक श्मिट के प्रस्ताव में भर्ती प्रक्रिया को लेकर सबसे अहम बदलाव अमेरिकी आवेदकों से जुड़ा है। इसके तहत कंपनियों को हर अमेरिकी उम्मीदवार का रिकॉर्ड रखने और उम्मीदवार को नौकरी नहीं देने की स्थिति में इसकी वजह दर्ज करने की व्यवस्था करने की मांग की गई है। इसके अलावा कंपनी को यह भी प्रमाणित करना होगा कि संबंधित पद पहले से किसी विदेशी कर्मचारी के लिए तय नहीं था।

क्या योग्य अमेरिकियों का इंटरव्यू भी जरूरी होगा?

प्रस्ताव में हाल ही में नौकरी गंवाने वाले योग्य अमेरिकी कर्मचारियों को संबंधित नौकरी की जानकारी देने की बात भी कही गई है। इसके अलावा जरूरी योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेने और उन्हें चयनित नहीं करने की स्थिति में लिखित कारण देने का सुझाव दिया गया है। श्मिट का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में अमेरिकी उम्मीदवारों को कई बार सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। उनका कहना है कि सिस्टम ऐसा होना चाहिए, जिसमें बेरोजगार अमेरिकी उम्मीदवार को वास्तव में नौकरी पाने का मौका मिले।

अमेरिका की अदालत ने ट्रंप को क्यों दिया झटका? H-1B वीजा पर अब क्या बदलेगा और भारतीयों को कितना होगा फायदा

20 साल से ज्यादा पुराने नियमों पर सवाल

एरिक श्मिट ने यह भी तर्क दिया है कि PERM के मौजूदा नियमों में 20 साल से ज्यादा समय से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इस दौरान अमेरिका में नौकरी तलाशने और भर्ती करने का तरीका काफी बदल चुका है। उनके मुताबिक, पहले अखबारों में नौकरी के विज्ञापन और स्थानीय रोजगार एजेंसियों के जरिए भर्ती प्रक्रिया ज्यादा सामान्य थी। अब ऑनलाइन जॉब पोर्टल और डिजिटल भर्ती का दौर है। इसके बावजूद पुराने नियमों की वजह से कंपनियों और आवेदकों के बीच भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

भारतीय प्रोफेशनल्स की मुश्किलें कितनी बढ़ेंगी?

अगर अमेरिकी श्रम विभाग इन प्रस्तावों को स्वीकार करता है और PERM प्रक्रिया को सख्त करता है, तो इसका सबसे पहला असर कंपनियों पर अनुपालन यानी compliance के रूप में पड़ सकता है। नियोक्ताओं को भर्ती प्रक्रिया का ज्यादा विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा और अमेरिकी उम्मीदवारों को लेकर अपने फैसलों का दस्तावेजीकरण करना पड़ सकता है। इससे विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। कंपनियां अतिरिक्त कागजी कार्रवाई और कानूनी जोखिम के चलते विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने को लेकर ज्यादा सतर्क भी हो सकती हैं।

H-1B और PERM में क्या है अंतर?

H-1B और PERM को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम रहता है। दोनों एक ही चीज नहीं हैं। H-1B वीजा अमेरिका में विशेष पेशों से जुड़ी अस्थायी नौकरी के लिए विदेशी कर्मचारियों को अनुमति देता है। वहीं PERM आमतौर पर रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़ा होता है। यानी PERM में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि H-1B वीजा तुरंत खत्म हो जाएगा। इसी तरह श्मिट के पत्र में किसी मौजूदा वीजा या आव्रजन स्थिति को तत्काल रद्द करने की बात भी नहीं कही गई है।

MpToday Editor MP Today के पास 27 years का journalism experience है। इस दौरान MP Today ने Madhya Pradesh की कई बड़ी media agencies और news organizations के साथ काम किया है और ground reporting से लेकर editorial analysis तक मजबूत पहचान बनाई है। MP Today की टीम ने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, विकास, crime और public interest news पर लगातार काम किया है। लंबे अनुभव और reliable sources की वजह से MP Today हमेशा accurate, fast और trustworthy news देने के लिए जाना जाता है।