दो साल बाद हुए रतलाम फुटबॉल एसोसिएशन के चुनाव पर बवाल,  कई क्लब ने उठाए सवाल !

दो साल से लंबित रतलाम जिला फुटबॉल एसोसिएशन के चुनाव आखिरकार हुए, लेकिन चुनाव खत्म होते ही निर्वाचन प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के कई फुटबॉल क्लबों ने चुनाव को मानने से इनकार करते हुए मध्यप्रदेश फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित देव को शिकायत भेजकर पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

Aug 30, 2026 - 16:09
Aug 30, 2026 - 16:14
दो साल बाद हुए  रतलाम फुटबॉल एसोसिएशन के चुनाव पर बवाल,  कई क्लब ने उठाए सवाल !

रतलाम/भोपाल।दो साल से लंबित रतलाम जिला फुटबॉल एसोसिएशन के चुनाव आखिरकार हुए, लेकिन चुनाव खत्म होते ही निर्वाचन प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के कई फुटबॉल क्लबों ने चुनाव को मानने से इनकार करते हुए मध्यप्रदेश फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित देव को शिकायत भेजकर पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब चुनाव की निगरानी के लिए मध्यप्रदेश फुटबॉल एसोसिएशन ने चार सदस्यीय समिति बनाई थी, तो फिर रतलाम के क्लबों और समिति के दो सदस्यों को चुनाव की पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई?
हाल ही में हुए चुनाव में शांतिलाल वर्मा को अध्यक्ष और राजेश कौशल को सचिव चुना गया। चुनाव को सर्वसम्मति से संपन्न होने का दावा किया गया। लेकिन चुनाव के बाद सामने आई शिकायतों ने इस 'सर्वसम्मति' पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्लबों का आरोप, चुनाव की जानकारी तक नहीं दी
जिले के फुटबॉल क्लबों की ओर से सलमान अब्बासी ने आरोप लगाया कि चुनाव निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के अनुसार नहीं कराए गए। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश फुटबॉल एसोसिएशन ने निर्वाचन प्रक्रिया की निगरानी के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की थी, लेकिन समिति के दो सदस्यों समेत रतलाम के किसी भी फुटबॉल क्लब को चुनाव की पूर्व सूचना नहीं दी गई।
क्लबों का आरोप है कि जिन क्लबों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व से जिला फुटबॉल एसोसिएशन की गतिविधियां चलती हैं, उन्हीं क्लबों को चुनाव से दूर रखकर निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कर दी गई। यही वजह है कि अब चुनाव की वैधता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

पहले दो साल तक चुनाव नहीं, अब चुनाव पर ही सवाल
विवाद की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। क्लबों के अनुसार जिला फुटबॉल एसोसिएशन के चुनाव करीब दो वर्षों से नहीं हुए थे। इस दौरान कई क्लबों ने मध्यप्रदेश फुटबॉल एसोसिएशन से शिकायतें भी की थीं।अब जब लंबे इंतजार के बाद चुनाव हुए तो विवाद खत्म होने के बजाय नई शिकायत ने पूरे चुनाव को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है।
शिकायत में मनफाइटर क्लब, मुनिमन फुटबॉल क्लब, मार्निंग स्टार फुटबॉल क्लब, नव भारत फुटबॉल क्लब, जावरा यूनाइटेड और रतलाम स्पोर्ट्स एसोसिएशन सहित अन्य क्लबों का उल्लेख किया गया है।क्लबों की ओर से शिकायत की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश फुटबॉल संघ के अध्यक्ष के साथ अखिल भारतीय फुटबॉल संघ , जिला खेल अधिकारी और मध्यप्रदेश ओलंपिक एसोसिएशन को भी भेजी गई है। क्लब पदाधिकारियों और खिलाड़ियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि चुनाव किस प्रक्रिया के तहत, किन क्लबों की मौजूदगी में और किन प्रतिनिधियों की सहमति से कराया गया।

 आरोप बेबुनियाद, चुनाव नियमों से हुआ
दूसरी ओर, जिला फुटबॉल एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा ने मीडिया रिपोर्टस में  क्लबों के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि चुनाव पूरी तरह नियमों के तहत कराए गए हैं।चुनाव की वैधता पर उठे सवालों के बाद अब निगाहें मध्यप्रदेश फुटबॉल एसोसिएशन के फैसले पर हैं। संघ को यह तय करना होगा कि मौजूदा कार्यकारिणी को मान्यता दी जाती है या शिकायतों की जांच कर निर्वाचन प्रक्रिया पर कोई निर्णय लिया जाता है।
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