21 साल बाद भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट जारी करने की दी मंजूरी, सीलिंग रहेगी जारी

भोपाल। करीब 21 साल से नए मास्टर प्लान का इंतजार कर रहे भोपाल के लिए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर आई। कोर्ट ने शहर के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान बताया कि ड्राफ्ट तैयार है और इसे जारी करने के […]

Sep 22, 2026 - 22:30
21 साल बाद भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट जारी करने की दी मंजूरी, सीलिंग रहेगी जारी

भोपाल। करीब 21 साल से नए मास्टर प्लान का इंतजार कर रहे भोपाल के लिए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर आई। कोर्ट ने शहर के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान बताया कि ड्राफ्ट तैयार है और इसे जारी करने के लिए कोर्ट की अनुमति मांगी गई थी। अब सरकार इसे अंतिम रूप देने से पहले सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी देगी।

करीब तीन घंटे चली सुनवाई में रिहायशी इलाकों में चल रहे कारोबार और नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने साफ किया कि जिन जगहों का लैंड यूज स्पष्ट रूप से रिहायशी है, वहां नियमों के खिलाफ चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि जिन जगहों के लैंड यूज को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है या मिक्स्ड लैंड यूज है, वहां कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

सीलिंग में लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुनवाई के दौरान भोपाल में सीलिंग को लेकर अब तक हुई कार्रवाई पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। रहवासियों की ओर से करीब 10 शिकायतें एमिकस क्यूरी के जरिए कोर्ट तक पहुंची थीं। इनमें आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को सील किया था, उनमें से कई बाद में दोबारा खुल गए और शाम के समय वहां कारोबार होने लगा।

कोर्ट ने अधिकारियों को अपने निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। रिहायशी जमीन पर चल रहे कारोबार के खिलाफ सीलिंग या जरूरत के मुताबिक दूसरी कार्रवाई जारी रहेगी, लेकिन जहां जमीन के उपयोग की स्थिति स्पष्ट नहीं है, वहां कार्रवाई नहीं होगी।

अभी नहीं बनेगी कोई नई कमेटी

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए केएन नटराजन ने कोर्ट को बताया कि सीलिंग से जुड़े मामले में सरकार से बातचीत हो चुकी है और फिलहाल कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। इससे पहले सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी, जिसकी कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

कोर्ट के सामने यह मुद्दा भी रखा गया कि सरकार की ओर से कमेटी बनाया जाना उसके आदेशों की अवमानना के दायरे में आता है। सरकार की ओर से नई कमेटी नहीं बनाने और सीलिंग की कार्रवाई में रुकावट नहीं डालने का भरोसा दिए जाने के बाद कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। अवमानना की कार्रवाई होगी या नहीं, यह लिखित आदेश से स्पष्ट होगा।

1995 के बाद भोपाल को नहीं मिला नया मास्टर प्लान

सीलिंग के विवाद के बीच भोपाल के मास्टर प्लान का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर में 1995 के बाद कोई नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया। 2005 तक के लिए बनाया गया मास्टर प्लान अपनी अवधि पूरी कर चुका है और इसके बाद शहर का विकास पुराने प्लान के आधार पर ही होता रहा।

नए मास्टर प्लान की प्रक्रिया कई बार आगे बढ़ी, लेकिन अंतिम रूप नहीं ले सकी। 2021 में मास्टर प्लान-2031 पर दावे-आपत्तियां बुलाई गईं और 2023 में संशोधित ड्राफ्ट भी जारी हुआ। बाद में सरकार ने 2031 वाले ड्राफ्ट को खारिज कर नए सिरे से प्लान तैयार करने का फैसला किया, जिसमें 2047 की आबादी को ध्यान में रखने की बात कही गई थी।

अब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नया ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। कोर्ट से इसे जारी करने की मंजूरी मिलने के बाद भोपाल के नए मास्टर प्लान की प्रक्रिया एक बार फिर आगे बढ़ सकेगी।

8 हजार से ज्यादा प्रतिष्ठानों को दिए गए थे नोटिस

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। निगम के रिकॉर्ड में दर्ज 62,500 दुकानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए थे। इसके बाद करीब 190 दुकानों को तीन दिन के लिए बंद या सील किया गया।

कार्रवाई के विरोध में व्यापारी भी सड़क पर उतर आए थे। विरोध के बाद सीलिंग करीब 22 दिन तक रुकी रही। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि रिहायशी उपयोग वाली जगहों पर नियमों के खिलाफ कारोबार होने पर कार्रवाई जारी रहेगी।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।