15 सेकंड का हैंडशेक और बड़ी डील! ईरान को सैन्य मदद नहीं देगा चीन, बोइंग से खरीदेगा 200 विमान
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग में अहम बैठक। चीन ने ईरान को सैन्य सामान न देने का किया वादा और 200 बोइंग विमानों की खरीद पर जताई सहमति। जानें क्या रहा इस मुलाकात का असली निचोड़।
Beijing: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों चीन के दौरे पर हैं, जहां बीजिंग में उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई। इस हाई-प्रोफाइल बैठक ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार से लेकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान ईरान और विमान सौदे ने खींचा।
ईरान को सैन्य मदद न देने का वादा
बैठक के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान को सैन्य सामान (Military Hardware) की आपूर्ति नहीं करने का वादा किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। ट्रंप के अनुसार, चीन ने आश्वासन दिया है कि वह ईरान की सैन्य शक्ति बढ़ाने में सहयोग नहीं करेगा।
चीन बनेगा अमेरिका-ईरान के बीच सेतु?
ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान से भारी मात्रा में तेल खरीदता है, इसलिए वह चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहे और क्षेत्र में शांति बनी रहे। ट्रंप के मुताबिक, जिनपिंग ने इच्छा जताई है कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही कोई समझौता हो। राष्ट्रपति जिनपिंग ने यह भी कहा कि यदि इस दिशा में किसी भी तरह की मदद की आवश्यकता होती है, तो चीन हमेशा सहयोग के लिए तैयार रहेगा।
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बोइंग के 200 विमानों की बड़ी डील
व्यापारिक मोर्चे पर ट्रंप ने एक और धमाका करते हुए दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिकी कंपनी बोइंग से 200 विमान खरीदने पर सहमति जताई है। हालांकि, चीन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अगर यह सौदा हकीकत बनता है, तो यह अमेरिकी विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित होगा।
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15 सेकंड का वो ‘पावरफुल’ हैंडशेक
मुलाकात की खबरों के बीच दोनों नेताओं के बीच हुआ ‘हैंडशेक’ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। ट्रंप ने अपनी ट्रेडमार्क शैली में तेजी से आगे बढ़कर जिनपिंग का हाथ थामा और लगभग 15 सेकंड तक उसे मजबूती से पकड़े रखा। कूटनीतिक गलियारों में इस लंबे हैंडशेक को दोनों देशों के बीच वर्चस्व की जंग और आपसी तालमेल की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।