US vs Iran: मिडिल ईस्ट में फिर मंडराए जंग के बादल, ट्रंप और नेतन्याहू की सीक्रेट बातचीत के बाद ईरान पर हमले की सुगबुगाहट

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नेतन्याहू के बीच हुई 30 मिनट की फोन कॉल के बाद ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई और युद्ध शुरू होने की आशंका काफी बढ़ गई है।

May 18, 2026 - 09:30
US vs Iran: मिडिल ईस्ट में फिर मंडराए जंग के बादल, ट्रंप और नेतन्याहू की सीक्रेट बातचीत के बाद ईरान पर हमले की सुगबुगाहट

Washington: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच कई हफ्तों तक चले भीषण सैन्य संघर्ष के बाद भले ही फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति स्थापित होने का नाम नहीं ले रही है। अंदरूनी सूत्र और खुफिया रिपोर्ट इशारा कर रही हैं कि यह सीजफायर बेहद कमजोर मोड़ पर है और इस सप्ताह कभी भी युद्ध दोबारा भड़क सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई एक बेहद अहम फोन कॉल ने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच लगभग 30 मिनट तक गंभीर चर्चा हुई, जिसके तुरंत बाद नेतन्याहू सुरक्षा कैबिनेट की आपातकालीन बैठक में शामिल हुए। वहीं दूसरी ओर, व्हाइट हाउस के पत्रकारों को भी आनन-फानन में साउथ लॉन में एक कार्यक्रम के लिए बुलाया गया।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी का बड़ा दावा

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने फॉक्स न्यूज को दिए एक बयान में दावा किया है कि तेहरान (ईरान) अमेरिका और इजरायल की संभावित सैन्य कार्रवाई की वापसी को लेकर बुरी तरह घबराया  है।

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान जानबूझकर टालमटोल और देरी करने की रणनीति अपना रहा है ताकि अमेरिका द्वारा की जाने वाली किसी भी नई सैन्य कार्रवाई को जटिल और मुश्किल बनाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि ईरान सीधे तौर पर जंग से बचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह पर्दे के पीछे से अपनी पुरानी गतिविधियों को भी अंजाम देने से बाज नहीं आ रहा है।

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ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत के मायने

दोनों नेताओं के बीच हुई इस आधे घंटे की बातचीत में मुख्य एजेंडा ईरान ही था। अधिकारियों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को अपनी चीन यात्रा के बारे में भी ब्रीफ किया। एक इजरायली अधिकारी ने मीडिया आउटलेट ‘वाईनेट’ को बताया कि ईरान पर दोबारा हमले का मुद्दा अभी पूरी तरह अनसुलझा है और अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति को ही लेना है।

अधिकारी के अनुसार, “राष्ट्रपति ट्रंप को खुद इस फैसले से संतुष्ट होना होगा और यदि वे ईरान के खिलाफ लड़ाई को फिर से शुरू करने का निर्णय लेते हैं, तो पूरी संभावना है कि इजरायल को भी इस सैन्य अभियान में सीधे शामिल होने के लिए कहा जाएगा।”

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परमाणु महत्वाकांक्षाओं से निराश हुए राष्ट्रपति ट्रंप

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक  ईरान की दोहरी नीति और उसकी परमाणु हथियार बनाने की महत्वाकांक्षाओं को लगातार जारी रखने के रवैये ने अमेरिकी प्रशासन को निराश किया है। राष्ट्रपति ट्रंप की यह निराशा ही ईरान के साथ दोबारा युद्ध शुरू होने का सबसे बड़ा कारण बन सकती है।

मिडिल ईस्ट में तैनात खुफिया अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान को इस बात का पूरा आभास है कि डोनाल्ड ट्रंप नए सिरे से उन पर बड़ी सैन्य कार्रवाई का सहारा ले सकते हैं। यही वजह है कि तेहरान कूटनीतिक रास्तों में देरी कर रहा है, लेकिन वाशिंगटन और यरूशलेम इस बार आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं।

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