पश्चिम बंगाल: फाल्टा विधानसभा सीट से TMC को बड़ा झटका, पुनर्मतदान से पहले जहांगीर खान ने वापस लिया नाम, जानें वजह

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी गहमागहमी के बीच फाल्टा विधानसभा सीट से एक बड़ी खबर सामने आई है। इस सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से अपना नाम वापस ले लिया है। इस अप्रत्याशित कदम से राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और फाल्टा

May 19, 2026 - 15:30
पश्चिम बंगाल: फाल्टा विधानसभा सीट से TMC को बड़ा झटका, पुनर्मतदान से पहले जहांगीर खान ने वापस लिया नाम, जानें वजह

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी गहमागहमी के बीच फाल्टा विधानसभा सीट से एक बड़ी खबर सामने आई है। इस सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से अपना नाम वापस ले लिया है। इस अप्रत्याशित कदम से राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और फाल्टा सीट पर चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। जहांगीर खान ने अपने इस निर्णय के पीछे फाल्टा के लोगों के हित को प्राथमिकता बताया है।

जहांगीर खान ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपने फाल्टा के लोगों के हित में मतदान प्रक्रिया से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और मेरी इच्छा है कि फाल्टा में शांति बनी रहे और इसका तेजी से विकास हो। हमारे वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज देने की घोषणा कर रहे हैं, यही कारण है कि मैं इस निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्मतदान से खुद को अलग कर रहा हूं।” उनके इस बयान ने फाल्टा के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया है कि अब इस सीट पर मुकाबला एकतरफा होने की प्रबल संभावना है।

21 मई को फाल्टा सीट पर दोबारा मतदान

गौरतलब है कि फाल्टा सीट पर बीते दिनों से काफी विवाद चल रहा था। दरअसल, पूर्व में हुए चुनाव के दौरान यह शिकायत मिली थी कि टीएमसी के कार्यकर्ताओं द्वारा वोटरों को धमकाया जा रहा है। इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने तत्काल कार्रवाई की। आयोग ने इस सीट पर हुए चुनाव को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया था। चुनाव आयोग ने फाल्टा में दोबारा चुनाव कराने का ऐलान किया था, जिसके अनुसार 21 मई को दोबारा मतदान होना निर्धारित किया गया है। वहीं, इस चुनाव के नतीजे 24 मई को सामने आएंगे। हालांकि, अब टीएमसी प्रत्याशी के चुनाव से हटने के बाद, चुनावी माहौल में बदलाव आया है और माना जा रहा है कि यहां अब मुकाबला अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा।

भाजपा ने संभाली बंगाल की कमान

वहीं, अगर पश्चिम बंगाल में हुए हालिया विधानसभा चुनाव की बात करें तो राज्य में चुनावी दंगल समाप्त हो चुका है और भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता की कमान संभाली है। इस चुनाव में ममता बनर्जी को व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। उन्हें न सिर्फ अपनी विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा, बल्कि उनकी पार्टी को भी सत्ता से हाथ धोना पड़ा, जिससे उनकी सरकार गिर गई। यह एक शर्मनाक प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ममता बनर्जी के साथ-साथ उनके 22 वरिष्ठ मंत्रियों को भी इस चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा, जो पूरी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ।

दूसरी ओर, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने दो-दो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की, जिससे पार्टी में उनका कद और बढ़ गया। भाजपा आलाकमान ने शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जताया और उन्हें प्रदेश में सत्ता की कमान सौंपते हुए मुख्यमंत्री बनाया। शुभेंदु ने न सिर्फ अपनी दोनों सीटों पर जीत दर्ज की, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि उन्होंने एक सीट पर सीधे ममता बनर्जी को धूल चटाई। पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी के सामने स्वयं ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही थीं, लेकिन यहां भी शुभेंदु ने उन्हें पराजित कर दिया। इससे पहले, पिछले विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु ने ममता बनर्जी को बंगाल की नंदीग्राम सीट पर हराया था। इस प्रकार, ममता बनर्जी को बार-बार हराने वाले शुभेंदु अधिकारी को ही भाजपा ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी, जो उनके राजनीतिक कौशल और लोकप्रियता का प्रमाण है।