PACL पोंजी घोटाले पर ED की बड़ी कार्रवाई, 5046 करोड़ रुपये की 126 संपत्तियां कुर्क, जानें पूरा मामला
देश के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में से एक, PACL लिमिटेड पोंजी स्कीम मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत दिल्ली और पंजाब में स्थित 126 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों का कुल
देश के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में से एक, PACL लिमिटेड पोंजी स्कीम मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत दिल्ली और पंजाब में स्थित 126 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य 5,046.91 करोड़ रुपये आंका गया है।
यह कार्रवाई उस व्यापक जांच का हिस्सा है जो लाखों निवेशकों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में चल रही है। PACL लिमिटेड ने एक फर्जी निवेश योजना के जरिए देशभर के आम लोगों को जमीन देने का झांसा देकर उनसे हजारों करोड़ रुपये जुटाए थे।
क्या है PACL घोटाला?
PACL यानी पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड घोटाला भारत की सबसे बड़ी पोंजी स्कीमों में से एक है। यह एक कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) थी, जिसमें कंपनी ने निवेशकों को कृषि और रियल एस्टेट विकास के नाम पर निवेश करने पर भारी रिटर्न या जमीन देने का वादा किया था।
असल में, यह एक पोंजी स्कीम थी, जिसमें नए निवेशकों से मिले पैसे का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने और एजेंटों को भारी कमीशन देने के लिए किया जाता था। इस तरह यह धोखाधड़ी का चक्र सालों तक चलता रहा। इस पूरे घोटाले के पीछे पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू का हाथ बताया जाता है, जिनकी अगस्त 2024 में मृत्यु हो चुकी है।
2014 से जारी है जांच
इस घोटाले का खुलासा होने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2014 में अपनी जांच शुरू की थी। सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर, प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। जांच में पता चला कि कंपनी ने फर्जी कंपनियों और कागजी लेन-देन के जरिए निवेशकों के पैसे को अवैध रूप से इधर-उधर किया था।
ईडी के अनुसार, अब तक इस मामले में कुल 22,656 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए एक समिति का गठन भी किया था, लेकिन इसके बावजूद कंपनी की संपत्तियों की अवैध बिक्री और हेरफेर जारी रही। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।