NCERT किताब विवाद मामला: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी विशेषज्ञ समिति की सूची, जानें कौन करेगा विवादित चैप्टर की समीक्षा

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताबों से जुड़े विवाद में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को उस विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की सूची सौंप दी है, जो विवादित चैप्टर की समीक्षा के लिए गठित की गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत

Mar 20, 2026 - 15:30
NCERT किताब विवाद मामला: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी विशेषज्ञ समिति की सूची, जानें कौन करेगा विवादित चैप्टर की समीक्षा

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताबों से जुड़े विवाद में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को उस विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की सूची सौंप दी है, जो विवादित चैप्टर की समीक्षा के लिए गठित की गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस उच्च-स्तरीय समिति में देश के कई जाने-माने कानूनी दिग्गज शामिल होंगे।

जानकारी के अनुसार, इस विशेषज्ञ समिति में वरिष्ठ वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक को सदस्य बनाया गया है। इनके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के एक और पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस भी समिति का हिस्सा होंगे। यह समिति विवादित अध्याय के कंटेंट की गहन समीक्षा करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई थी चिंता?

यह पूरा मामला तब गरमाया जब सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी द्वारा अध्याय को फिर से लिखने के रुख पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। दरअसल, एनसीईआरटी के निदेशक ने एक हलफनामा दायर कर कहा था कि संशोधित अध्याय को आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में शामिल किया जाएगा।

इस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, “हम एनसीईआरटी के निदेशक द्वारा हलफनामे के पैरा 15 में व्यक्त किए गए रुख से भी उतने ही चिंतित हैं।”

प्रकाशन पर रोक का दिया था निर्देश

अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। पीठ ने कहा था, “हम निर्देश देते हैं कि यदि विषय की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 4 को किसी भी प्रकार से फिर से लिखा गया है, तो उसे तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों वाली एक समिति द्वारा अनुमोदित नहीं किया जाता है।”

बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक डोमेन एक्सपर्ट कमेटी बनाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कानूनी अध्ययन पर सामग्री तैयार करने के लिए नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल से भी सलाह ली जाए। इसके साथ ही, कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक के विवादास्पद अध्याय में भूमिका के बाद प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, शिक्षक सुपर्णा दिवाकर और कानूनी शोधकर्ता आलोक प्रसन्ना कुमार को स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने की किसी भी भूमिका से बाहर करने का आदेश भी दिया गया था।