फर्जी लिंक, वीडियो कॉल और ब्लैक स्क्रीन.. रिटायर्ड बैंक अधिकारी बने साइबर ठगी का शिकार, 1.20 लाख रुपये का लगा चूना

इंदौर में एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी साइबर ठगों के जाल में फंसकर 1.20 लाख रुपये गंवा बैठे। बदमाशों ने पार्सल ट्रैकिंग के बहाने उन्हें निशाना बनाया और फर्जी लिंक व वीडियो कॉल के माध्यम से उनके बैंक खाते से रकम निकाल ली। यह घटना साइबर अपराधों के बढ़ते दायरे और आम नागरिकों की सुरक्षा पर

Aug 3, 2026 - 16:30
फर्जी लिंक, वीडियो कॉल और ब्लैक स्क्रीन.. रिटायर्ड बैंक अधिकारी बने साइबर ठगी का शिकार, 1.20 लाख रुपये का लगा चूना

इंदौर में एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी साइबर ठगों के जाल में फंसकर 1.20 लाख रुपये गंवा बैठे। बदमाशों ने पार्सल ट्रैकिंग के बहाने उन्हें निशाना बनाया और फर्जी लिंक व वीडियो कॉल के माध्यम से उनके बैंक खाते से रकम निकाल ली। यह घटना साइबर अपराधों के बढ़ते दायरे और आम नागरिकों की सुरक्षा पर मंडराते खतरे को एक बार फिर उजागर करती है, जहां जालसाज हर दिन नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं।

कनाड़िया क्षेत्र के बिचौली हप्सी निवासी 63 वर्षीय प्रकाश सातपुते, जो स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, इस धोखाधड़ी के शिकार हुए। उन्होंने अपने बेटे प्रखर, जो बेंगलुरु में रहता है, के लिए डीटीडीसी कूरियर के माध्यम से घरेलू सामान का एक पार्सल भेजा था। कूरियर कंपनी द्वारा उन्हें ट्रैकिंग नंबर भी प्रदान किया गया था, जिससे वे अपने पार्सल की स्थिति पर नज़र रख सकें और डिलीवरी का अनुमान लगा सकें।

साइबर ठगों ने कैसे बिछाया जाल?

पार्सल 20 जुलाई को डिलीवर होना था, लेकिन अगले दिन, 21 जुलाई को जब प्रकाश सातपुते ने अपने बेटे से बात की, तो पता चला कि पार्सल अभी तक नहीं पहुंचा है। इससे चिंतित होकर, उन्होंने इंटरनेट पर ट्रैकिंग नंबर डालकर पार्सल की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया। यहीं से साइबर ठगों का बिछाया जाल सक्रिय हो गया। उनकी ऑनलाइन खोजबीन के दौरान एक चैट बॉक्स खुला, जिसने उन्हें आगे की सहायता के लिए वॉट्सएप पर संपर्क करने का निर्देश दिया। यह अक्सर साइबर अपराधियों द्वारा उपयोग की जाने वाली एक आम रणनीति है, जिसमें वे पीड़ितों को एक नियंत्रित वातावरण में खींच लेते हैं।

वॉट्सएप पर फर्जी लिंक क्लिक, फिर ठगों के जाल में फंसे

प्रकाश सातपुते ने निर्देशों का पालन करते हुए वॉट्सएप पर संपर्क किया। कुछ ही देर बाद, उन्हें वॉट्सएप पर एक लिंक प्राप्त हुआ। जैसे ही उन्होंने उस लिंक पर क्लिक किया, एक वीडियो कॉल शुरू हो गई। इस कॉल में किसी व्यक्ति का चेहरा दिखाई नहीं दिया, केवल एक अज्ञात आवाज सुनाई दे रही थी, जिसने उनके भरोसे को और भ्रमित किया। बात करने वाले जालसाज ने पार्सल को ट्रैक करने के लिए उन्हें एक और ऑनलाइन लिंक भेजा। इस लिंक को खोलने पर एक फॉर्म सामने आया, जिसमें कुछ जानकारी भरने के बाद 5 रुपये का छोटा-सा ऑनलाइन भुगतान करने के लिए कहा गया। बिना किसी शक के, प्रकाश सातपुते ने अपने क्रेडिट कार्ड का विवरण उस फॉर्म में दर्ज कर दिया, यह नहीं जानते थे कि वे सीधे ठगों के चंगुल में फंस रहे हैं और अपनी वित्तीय जानकारी साझा कर रहे हैं।

आधे घंटे तक वीडियो कॉल, और खाते से उड़ाए 1.20 लाख रुपये

क्रेडिट कार्ड विवरण दर्ज करने के बाद, ठग ने उनसे ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आने की बात कही। लेकिन, ठीक उसी समय, उनके मोबाइल फोन की स्क्रीन अचानक काली पड़ गई। करीब आधे घंटे तक यह वीडियो कॉल जारी रही, जबकि स्क्रीन ब्लैक ही रही और पीड़ित कुछ भी देख या समझ नहीं पा रहे थे। इसी दौरान, उनके मोबाइल पर लगातार खाते से रकम कटने के संदेश आने लगे। अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से उनके खाते से कुल 1 लाख 20 हजार रुपये निकाल लिए गए। यह एक सुविचारित और सुनियोजित धोखाधड़ी थी, जिसमें पीड़ित को भ्रमित रखकर और उनकी स्क्रीन पर नियंत्रण कर उनके बैंक खाते को खाली कर दिया गया।

जब प्रकाश सातपुते के मोबाइल पर खाते से बड़ी रकम कटने के संदेशों की झड़ी लग गई और उनके बैंक खाते से पैसे निकलने लगे, तब उन्हें इस भयावह साइबर ठगी का अहसास हुआ। अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने के बाद, उन्होंने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज कराई, ताकि इस अपराध पर अंकुश लगाया जा सके और दोषियों को पकड़ा जा सके।

अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज, जांच में जुटी पुलिस

शिकायत के आधार पर, कनाड़िया थाना पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन शातिर आरोपियों ने किस तरह फर्जी लिंक और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित की बैंकिंग जानकारी हासिल की और इस ठगी को अंजाम दिया। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि ऑनलाइन लेनदेन और अज्ञात लिंक्स पर क्लिक करते समय अत्यधिक सावधानी बरतना कितना महत्वपूर्ण है, खासकर जब साइबर अपराधी हर दिन नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। पुलिस इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और आईपी एड्रेस के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है, ताकि इन अपराधियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।