ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में 48 साल बाद खुला रत्न भंडार का खजाना, 3D मैपिंग और वीडियोग्राफी के साथ सोने-चांदी की गिनती
पुरी स्थित 12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर में लगभग पांच दशकों के बाद आखिरकार वह दिन आ ही गया जिसका सबको इंतजार था। बुधवार, 25 मार्च 2026 को, मंदिर के रहस्यमयी रत्न भंडार के दरवाजों को खोला गया ताकि उसमें रखे सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य रत्नों की गिनती और सत्यापन किया जा सके।
पुरी स्थित 12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर में लगभग पांच दशकों के बाद आखिरकार वह दिन आ ही गया जिसका सबको इंतजार था। बुधवार, 25 मार्च 2026 को, मंदिर के रहस्यमयी रत्न भंडार के दरवाजों को खोला गया ताकि उसमें रखे सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य रत्नों की गिनती और सत्यापन किया जा सके। यह ऐतिहासिक प्रक्रिया दोपहर 12:09 बजे से 1:45 बजे के बीच शुभ मुहूर्त में शुरू हुई।
यह प्रक्रिया 48 साल के एक लंबे अंतराल के बाद हो रही है, जिससे इस खजाने में मौजूद संपत्ति को लेकर उत्सुकता चरम पर है। अधिकारियों के अनुसार, इस काम को पूरी पारदर्शिता और सटीकता के साथ पूरा करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
क्यों अहम है यह गिनती?
पिछली बार मंदिर के खजाने की विस्तृत सूची 13 मई से 23 जुलाई, 1978 के बीच तैयार की गई थी। इतने वर्षों के बाद हो रही यह गिनती न केवल संपत्ति का सत्यापन करेगी, बल्कि भविष्य के लिए एक सटीक और आधुनिक रिकॉर्ड भी तैयार करेगी। इस प्रक्रिया में सबसे पहले मंदिर की चल संपत्तियों का मिलान 1978 में तैयार की गई विस्तृत सूची से किया जाएगा।
हाई-टेक सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी
इस पूरे काम को बेहद कड़ी और बहु-स्तरीय सुरक्षा के बीच अंजाम दिया जा रहा है। सटीकता सुनिश्चित करने के लिए पहली बार वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और 3D मैपिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है। ओडिशा सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत गठित टीम में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दो विशेषज्ञ, यूको बैंक के एक प्रतिनिधि और मंदिर के अपने स्वर्णकार शामिल हैं, जो सोने और रत्नों का मूल्यांकन करेंगे।
कैसे रखे जाएंगे कीमती आभूषण?
मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, सभी कीमती वस्तुओं को वर्गीकृत कर सुरक्षित रखा जाएगा। सोने के आभूषणों को पीले मखमल के कपड़े में लपेटकर टिन के बक्सों में रखा जाएगा। वहीं, चांदी के आभूषणों के लिए सफेद या चांदी रंग का कपड़ा इस्तेमाल होगा, जबकि अन्य कीमती वस्तुओं को लाल मखमल के कपड़े में लपेटकर संदूकों में सुरक्षित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य हर एक कीमती वस्तु का सही दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करना है।
इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसका भी ध्यान रखा गया है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि गणना अवधि के दौरान भक्त बैरिकेड वाले क्षेत्र के बाहर से भगवान के दर्शन कर सकेंगे।