इंदौर में गंदगी के बीच बन रही थी आइसक्रीम, केमिकल से पक रहे थे फल, फूड विभाग का बड़ा एक्शन
इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, लेकिन इसी शहर में खाने-पीने की चीजों को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, उसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया कार्रवाई में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां लोगों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा
इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, लेकिन इसी शहर में खाने-पीने की चीजों को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, उसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया कार्रवाई में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां लोगों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा था। कहीं गंदगी के बीच आइसक्रीम बनाई जा रही थी तो कहीं फलों को जल्दी पकाने के लिए खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ प्रतिष्ठानों में बिना वैध लाइसेंस के खाद्य सामग्री तैयार की जा रही थी। वहीं एक रेस्टोरेंट में वेज और नॉनवेज खाद्य सामग्री एक साथ रखी मिली। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कई जगहों से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर शहर में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धार रोड पर गंदगी के बीच बन रही थी आइसक्रीम
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जब धार रोड क्षेत्र स्थित एक खाद्य निर्माण इकाई पर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच के दौरान पता चला कि परिसर में बिना अनुमति और वैध लाइसेंस के आइसक्रीम और कुल्फी का निर्माण किया जा रहा था।
अधिकारियों के मुताबिक परिसर में बड़े पैमाने पर फ्रोजन डेजर्ट और आइसक्रीम का भंडारण किया गया था। वहीं दूसरी ओर कुल्फी और आइसक्रीम तैयार करने का काम भी चल रहा था। जब टीम ने लाइसेंस और जरूरी दस्तावेज मांगे तो संचालक वैध अनुमति से जुड़े स्पष्ट कागजात पेश नहीं कर पाया।
जांच के दौरा सबसे बड़ी लापरवाही साफ-सफाई को लेकर सामने आई। आइसक्रीम के सांचे सीधे गंदे फर्श पर रखे हुए मिले और आसपास स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब थी। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में तैयार किए जा रहे खाद्य पदार्थ लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
फूड सेफ्टी जांच में खुली कई बड़ी लापरवाहियां
इंदौर में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रही। टीम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में कई खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की। धार रोड क्षेत्र स्थित एक आइस कैंडी निर्माण परिसर में भी अधिकारियों ने निरीक्षण किया, जहां विभिन्न प्रकार की आईस कैंडी और फ्रोजन डेजर्ट तैयार किए जा रहे थे। जांच के दौरान टीम ने खाद्य पदार्थों के पांच नमूने लेकर उन्हें परीक्षण के लिए भेज दिया।
इसके अलावा कलेक्टर हेल्पलाइन पर मिली शिकायत के आधार पर एक फरियाली और फास्ट फूड सेंटर की भी जांच की गई। यहां साबूदाना खिचड़ी का सैंपल लिया गया। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल को लेकर कई कमियां सामने आईं, जिसके बाद अधिकारियों ने संचालक को जरूरी सुधार करने के सख्त निर्देश दिए।
फूड विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शहरभर में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोगों तक सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री पहुंच सके।
वेज और नॉनवेज एक साथ रखने पर नोटिस
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। शहर के एक फूड प्रतिष्ठान में वेज और नॉनवेज खाद्य सामग्री एक साथ रखी मिली। खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग-अलग तरीके से स्टोर करना जरूरी होता है, ताकि संक्रमण और मिलावट का खतरा न रहे। लेकिन निरीक्षण के दौरान नियमों की अनदेखी साफ दिखाई दी।
खाद्य सुरक्षा टीम ने मौके से सॉस और पनीर के नमूने जांच के लिए जब्त किए और संबंधित संचालक को नोटिस जारी किया। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
केमिकल से पकाए जा रहे थे फल
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान सबसे गंभीर मामला पालदा स्थित एक केला कोल्ड स्टोरेज में सामने आया। जांच में पता चला कि फलों को जल्दी पकाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई व्यापारी फलों को जल्दी बाजार में बेचने के लिए केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। इससे फल बाहर से जल्दी पीले और आकर्षक दिखने लगते हैं, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है।