सूत और कपास की बढ़ी कीमतों पर असदुद्दीन ओवैसी ने जताई चिंता, केंद्र सरकार के सामने रखी चार प्रमुख मांगें
देश के माइक्रो पावरलूम सेक्टर पर गहराया संकट! सूत और कपास की बढ़ी कीमतों ने हालात बिगाड़ दिए हैं। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अचानक बढ़ी कीमतों से देश के प्रमुख बुनाई केंद्र प्रभावित हुए हैं। महाराष्ट्र के मालेगांव और भिवंडी में संकट गहराया है। गुजरात
देश के माइक्रो पावरलूम सेक्टर पर गहराया संकट! सूत और कपास की बढ़ी कीमतों ने हालात बिगाड़ दिए हैं। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अचानक बढ़ी कीमतों से देश के प्रमुख बुनाई केंद्र प्रभावित हुए हैं। महाराष्ट्र के मालेगांव और भिवंडी में संकट गहराया है। गुजरात के सूरत, उत्तर प्रदेश के वाराणसी, साथ ही दक्षिण भारत के इरोड और कोयंबटूर जैसे बड़े बुनाई केंद्र भी इसकी चपेट में हैं। कपास और पीसी यार्न यानी सूत के दाम में अचानक और भारी उछाल देखा गया है।
ओवैसी ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया। केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री गिरिराज सिंह और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को टैग कर उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया, महज एक महीने में सूत की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जबकि कपड़े के दाम स्थिर बने हुए हैं। इस असमानता का सीधा असर छोटे पावरलूम यूनिट्स पर पड़ा है। वे भारी नुकसान झेल रहे हैं। उनका उत्पादन घट गया है और कई इकाइयों के बंद होने की नौबत आ गई है।
ओवैसी ने दावा किया कि यह संकट देश के सबसे अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों में से एक को प्रभावित कर रहा है। यह एक श्रम-प्रधान उद्योग है, जहां करीब 40 से 60 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ओवैसी ने दोनों मंत्रियों से चार महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं।
ओवैसी ने सरकार के सामने रखी मांगें
ओवैसी ने सरकार से ये चार प्रमुख मांगें रखी हैं: पहला, कच्चे कपास और सूत के निर्यात पर तत्काल रोक लगाई जाए। दूसरा, कच्चे कपास पर लगने वाला आयात शुल्क पूरी तरह हटाया जाए। तीसरा, चीनी आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जाए ताकि घरेलू उद्योग को संरक्षण मिले। और चौथा, फैब्रिक व गारमेंट्स के निर्यात प्रोत्साहन को बढ़ाया जाए, जिससे प्रतिस्पर्धा में मदद मिले।
इससे पहले, कपड़ा उद्योग ने भी सरकार से ऐसी ही अपील की थी। उद्योग ने कपास पर लगने वाला 11 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह शुल्क क्षेत्र पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। साथ ही उद्योग ने आपूर्ति की कमी के दौरान आयातित कपास तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत बताई थी। यह जानकारी भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (सिटी) की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट में कपास क्षेत्र पर बड़ा खुलासा
देश के कपास क्षेत्र पर एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट गुरुवार को जारी हुई। इस रिपोर्ट में उत्पादन, मूल्य निर्धारण, व्यापार नीति और वस्त्र मूल्य श्रृंखला की प्रतिस्पर्धात्मकता का गहन विश्लेषण किया गया है। यह रिपोर्ट गर्जी और अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी) ने संयुक्त रूप से तैयार की है। ‘भारत में कपास की आपूर्ति, मूल्य निर्धारण एवं व्यापार नीति का आर्थिक विश्लेषण’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क के प्रतिकूल प्रभावों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट ने आपूर्ति की कमी के दौरान आयातित कपास तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। इसमें फाइबर की गुणवत्ता सुधारने और घरेलू बाजार स्थितियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने की सिफारिशें भी शामिल हैं।
सिटी के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने बताया कि यह रिपोर्ट 2030 तक के लिए एक खाका प्रस्तुत करती है। वस्त्र एवं परिधान उद्योग के लिए 350 अरब डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य में 100 अरब डॉलर का निर्यात भी शामिल है।
.@girirajsinghbjp @PiyushGoyal Sudden and massive hikes in cotton & PC yarn prices are devastating India’s micro powerloom sector in Malegaon, Bhiwandi, Ichalkaranji, Surat, Varanasi, Erode, Coimbatore and other weaving hubs.
In just one month, yarn prices have surged sharply,…
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) May 9, 2026