“कमलनाथ का हारना असंभव था, वोट चोरी से हराया गया..” 2023 के चुनाव नतीजों पर नकुलनाथ का बड़ा दावा, जानें और क्या कहा

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में 2023 के विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी नतीजों से जुड़े नए दावों और बयानों के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे एवं पूर्व सांसद […]

Sep 26, 2026 - 17:30
“कमलनाथ का हारना असंभव था, वोट चोरी से हराया गया..” 2023 के चुनाव नतीजों पर नकुलनाथ का बड़ा दावा, जानें और क्या कहा

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में 2023 के विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी नतीजों से जुड़े नए दावों और बयानों के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे एवं पूर्व सांसद नकुलनाथ ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर बड़ा दावा किया है।

नकुलनाथ ने दावा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में कमलनाथ का हारना असंभव था। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बार फिर स्पष्ट किया कि बड़े पैमाने पर वोट चोरी की शुरुआत मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 से हुई थी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कहा कि उनकी टेक्निकल एक्सपर्ट टीम ने स्पष्ट रूप से बताया था कि ऐसे चुनावी नतीजे आ ही नहीं सकते थे।

नकुलनाथ ने 2023 चुनाव के ​परिणामों पर उठाए सवाल

नकुलनाथ ने आगे कहा कि राहुल गांधी के हाल ही में दिये गये बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी मध्यप्रदेश 2023 का विधानसभा चुनाव जीत रही थी लेकिन वोट चोरी से कमलनाथ जैसे दिग्गज एवं कुशल रणनीतिकार को हराया गया। इसका एक सबूत यह भी है कि 2018 में कमलनाथ के नेतृत्व में जब कांग्रेस पार्टी जीती थी तब कांग्रेस के दबाव में चुनाव आयोग ने 24 लाख फर्जी मतदाता हटाए थे।

मतदाता सूची को लेकर नकुलनाथ का बड़ा आरोप

पूर्व सांसद नकुलनाथ ने आगे कहा कि 2023 में शिकायतें सामने आने के बावजूद कथित फर्जी वोटरों के नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए गए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के बाद आयोग ने भी माना था कि मध्यप्रदेश में करीब 33 लाख फर्जी वोटर थे। नकुलनाथ ने आरोप लगाया कि एमपी विधानसभा चुनाव 2023 से शुरू हुई लोकतंत्र की हत्या अब ईवीएम और मतदाता सूची के जरिए करोड़ों मतदाताओं के वोटों की हत्या तक पहुंच गई है।

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