ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, चुनाव आयोग के फैसलों की स्वतंत्र जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर बिना जरूरी कानूनी प्रक्रिया के लिए गए फैसलों को रद्द करने, पूरे मामले की […]

Sep 25, 2026 - 17:30
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, चुनाव आयोग के फैसलों की स्वतंत्र जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर बिना जरूरी कानूनी प्रक्रिया के लिए गए फैसलों को रद्द करने, पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, कैबिनेट सचिव, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को पक्षकार बनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका 

इस याचिका में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची में संशोधन और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम से जुड़े मुद्दे शामिल होने की बात कही गई है।

फॉर्म 6 में बदलाव पर सवाल

याचिका में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किए गए बदलाव को प्रमुख आधार बनाया गया है। आरोप है कि फॉर्म में पिछले एसआईआर से संबंधित जानकारी जोड़ी गई, जबकि यह एक वैधानिक फॉर्म है और इसमें बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी था। याचिकाकर्ता का कहना है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने भी इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। याचिका में फॉर्म 6 को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई है।

ECINet के केंद्रीकरण का भी मुद्दा

मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल सिस्टम ECINet और ERONet को लेकर भी याचिका में सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की जिम्मेदारी कानून के तहत संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की होती है।

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला

याचिका में गोवा के 97 मतदाताओं का भी उल्लेख किया गया है। उल्लेख है कि अदालत के आदेश के बावजूद इन पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं जोड़े जा सके। इसके पीछे सॉफ्टवेयर में पहले की स्थिति पर लौटने की सुविधा नहीं होने को वजह बताया गया है।

पश्चिम बंगाल की 16.10 लाख अपीलों पर विवाद

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से जुड़े मामलों को भी याचिका में उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि न्यायिक अधिकारियों की ओर से कई लोगों के नाम मतदाता सूची में बहाल किए जाने के बाद चुनाव आयोग ने करीब 16.10 लाख मामलों में अपील दाखिल की। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन अपीलों को दाखिल करने के लिए आवश्यक आधिकारिक मंजूरी नहीं ली गई। याचिका में इन अपीलों को रद्द करने की मांग की गई है।

 विशेष जांच दल या न्यायिक जांच की मांग की

याचिका में देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान लगभग 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा भी किया गया है। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल या न्यायिक जांच आयोग गठित करने की मांग की है। इसमें स्वतंत्र आईटी और साइबर विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। याचिका में ECINet और ERONet के डेटा की फॉरेंसिक जांच के साथ सर्वर लॉग, डेटाबेस और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है, ताकि बाद में उनकी स्वतंत्र जांच की जा सके।