आज मोहन सरकार की समीक्षा बैठक, ढाई साल के कामकाज और अचीवमेंट पर किया जाएगा मंथन

मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के आगामी 13 जून को ढाई वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। वहीं इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल आज प्रदेश सरकार के मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दिन भर ये बैठकें चलेंगी। इन बैठकों में दिसंबर 2023

May 17, 2026 - 11:30
आज मोहन सरकार की समीक्षा बैठक, ढाई साल के कामकाज और अचीवमेंट पर किया जाएगा मंथन

मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के आगामी 13 जून को ढाई वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। वहीं इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल आज प्रदेश सरकार के मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दिन भर ये बैठकें चलेंगी। इन बैठकों में दिसंबर 2023 में सरकार गठन से लेकर अब तक ढाई साल में किए गए कामों का हिसाब लिया जाएगा। इसके साथ ही, अगले ढाई साल के टारगेट्स की जानकारी भी ली जाएगी।

वहीं मंत्रियों से विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। प्रभार के जिले में अशासकीय नामांकन और विभिन्न समितियों के गठन की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी जाएगी। इसमें दिशा समिति, जनभागीदारी समिति, जिला स्तरीय समन्वय समिति और मॉनिटरिंग कमेटी सहित सभी अशासकीय समितियों की वर्तमान स्थिति का ब्योरा देना होगा। कौन-कौन सी समितियां बन चुकी हैं, कितनी बाकी हैं और जिनका गठन हो चुका है उनकी कार्यप्रणाली कैसी चल रही है, इसकी पूरी जानकारी ली जाएगी।

राजनीतिक स्थिति की गहन समीक्षा की जाएगी

इसके अतिरिक्त, मंत्रियों से उनकी स्वयं की विधानसभा सीट, उनके गृह जिले और प्रभार वाले जिले की राजनीतिक स्थिति की गहन समीक्षा की जाएगी। खासतौर पर हारी हुई विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पार्टी संगठन इन सीटों पर वर्तमान स्थिति, कमजोर बूथों, विरोधी दलों की गतिविधियों, विकास कार्यों की स्थिति और अगले विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा करेगा।

विभाग के बारे में भी मंत्री जानकारी देंगे

विभाग के बारे में भी मंत्री जानकारी देंगे। यह बिंदु समीक्षा के बजाय फीडबैक के लिए रखा गया है। मंत्री अपने विभाग में आने वाली कोई विशेष समस्या, चुनौती, अच्छा काम या नई पहल के बारे में खुलकर बताएंगे। मुख्यमंत्री और जामवाल साहब इस दौरान कोई भी सुझाव या दिशा-निर्देश देंगे। इस विषय पर चर्चा के दौरान कुछ मंत्री अपने विभाग में अफसरों की मनमानी का मुद्दा भी उठा सकते हैं।

संकल्प पत्र के कितने वादे पूरे हुए?

आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों पर भी बात होगी। मंत्री से जिले में कितनी सीटें मजबूत हैं, कितनी कमजोर हैं, प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया, बूथ स्तर की तैयारी और चुनावी रणनीति पर उनके सुझाव मांगे जाएंगे। साथ ही, संकल्प पत्र के कितने वादे पूरे हुए हैं, इसकी भी जानकारी ली जाएगी। प्रत्येक मंत्री को अपने विभाग के संकल्प बिंदु (मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए लक्ष्य) दिए गए थे। इन बिंदुओं की वर्तमान स्थिति क्या है, कितने पूरे हो चुके हैं, कितने प्रगति पर हैं और कितने बाकी बचे हैं, इसकी विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी।

पूरा ब्योरा देना होगा

विभाग के अंतर्गत आने वाले निगम, मंडल, बोर्ड आदि के साथ समन्वय की स्थिति भी बतानी होगी। हाल ही में नियुक्त नए अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों के प्रशिक्षण की क्या योजना है, इसका पूरा ब्योरा देना होगा। जिन मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री हैं, उनसे कार्य विभाजन को लेकर चर्चा की जाएगी। कौन-कौन से काम कैबिनेट मंत्री देखते हैं और कौन-कौन से काम राज्यमंत्री देख रहे हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए। वर्तमान में राज्यमंत्रियों के पास सिर्फ तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादलों के ही अधिकार हैं।

पार्टी के साथ समन्वय पर भी चर्चा होगी। मंत्री को अपने गृह जिले और प्रभार वाले जिलों में भाजपा संगठन (जिला अध्यक्ष, महामंत्री, विधायकों आदि) के साथ समन्वय की स्थिति बतानी होगी। संगठन के साथ कितना सामंजस्य है और कहां दिक्कतें आ रही हैं, इस पर खुलकर चर्चा होगी। मंत्री को यह भी बताना होगा कि उन्होंने अपने प्रभार वाले जिलों में कितने दौरे किए, कितनी बैठकें लीं, किन-किन विकास कार्यों की समीक्षा की और क्या-क्या निर्णय लिए। भ्रमण रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाएगी।

योजनाओं में भागीदारी की जानकारी भी ली जाएगी

शासन की प्रमुख योजनाओं में भागीदारी की जानकारी भी ली जाएगी। लाड़ली बहना, मुख्यमंत्री किसान कल्याण, गृह प्रवेश, मेरा घर योजना जैसी मुख्यमंत्री की प्रमुख योजनाओं में मंत्री की व्यक्तिगत भागीदारी, प्रचार-प्रसार और जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग की जानकारी ली जाएगी। प्रभार के जिलों की विशेष समस्याओं (जल संकट, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि) और उल्लेखनीय उपलब्धियों दोनों की जानकारी मांगी जाएगी। मंत्री को अपनी प्राथमिकता बतानी होगी कि वे इन समस्याओं का समाधान कैसे करना चाहते हैं।

मोहन सरकार के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसम्पर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय एवं अन्य समस्त विभाग हैं। उप मुख्यमंत्रियों में जगदीश देवड़ा के पास वाणिज्यिक कर, वित्त, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन, योजना और राजेंद्र शुक्ल के पास लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा विभाग हैं।

कैबिनेट मंत्रियों में कुंवर विजय शाह जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास संभाल रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय नगरीय विकास एवं आवास, संसदीय कार्य और प्रह्लाद सिंह पटेल पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास, श्रम एवं रोजगार मंत्री हैं। राकेश सिंह लोक निर्माण, करण सिंह वर्मा राजस्व और राव उदय प्रताप सिंह स्कूल शिक्षा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री हैं। संपतिया उइके लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, तुलसीराम सिलावट जल संसाधन और निर्मला भूरिया महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं। एदल सिंह कंसाना किसान कल्याण एवं कृषि विकास, गोविंद सिंह राजपूत उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और कैलाश विश्वास सारंग सहकारिता, युवा कल्याण एवं खेल मंत्री हैं। नारायण सिंह कुशवाह उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, प्रद्युम्न सिंह तोमर ऊर्जा और नागर सिंह चौहान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री हैं। राकेश शुक्ला नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, इंदर सिंह परमार तकनीकी शिक्षा, आयुष, उच्च शिक्षा और चेतन्य कश्यप सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री हैं।

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) में कृष्णा गौर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्ध-घुमक्कड़ जातियाँ, धर्मेंद्र सिंह लोधी संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, पर्यटन, गौतम तेटवाल कौशल विकास एवं उद्यमिता, नारायण सिंह पंवार मत्स्य पालन, दिलीप जायसवाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग और लखन पटेल पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग संभाल रहे हैं। राज्यमंत्रियों में प्रतिमा बागरी नगरीय विकास एवं आवास, नरेंद्र शिवाजी पटेल लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, राधा सिंह पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास और दिलीप अहिरवार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में हैं।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।