केंद्र सरकार का बड़ा फैसला! चांदी आयात पर केंद्प्बंध: विदेशी मुद्रा बचाने की नई रणनीति
देश में चांदी के अप्रतिबंधित आयात का दौर अब समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार ने इस बहुमूल्य धातु के आयात को ‘मुक्त’ श्रेणी से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया है। इसके परिणाम स्वरूप अब चांदी के आयात के लिए सरकारी मंजूरी या लाइसेंस की अनिवार्यता होगी। यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है, जिसका
देश में चांदी के अप्रतिबंधित आयात का दौर अब समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार ने इस बहुमूल्य धातु के आयात को ‘मुक्त’ श्रेणी से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया है। इसके परिणाम स्वरूप अब चांदी के आयात के लिए सरकारी मंजूरी या लाइसेंस की अनिवार्यता होगी। यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है, जिसका सीधा असर देश के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने की उम्मीद है।
यह निर्णय हाल ही में चांदी के आयात में हुई अप्रत्याशित वृद्धि के मद्देनजर लिया गया है। बीते अप्रैल माह में चांदी के आयात में वार्षिक आधार पर लगभग 157 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। इसी से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा था, जिससे सरकार को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। इससे पहले भी सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। इस पूर्ववर्ती कदम का मुख्य उद्देश्य भी आयात को नियंत्रित करना और ऊर्जा तथा उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिए महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा बचाना था।
इस प्रतिबंध में बुलियन-ग्रेड चांदी, जिसमें 99.9 प्रतिशत या उससे अधिक वजन वाली चांदी की छड़ें शामिल हैं, तथा अन्य प्रकार की चांदी की छड़ें शामिल हैं। इन सभी को हार्मोनाइज्ड सिस्टम (एचएस) कोड के तहत वर्गीकृत किया गया है। अधिसूचना के अनुसार, शनिवार से चांदी का अप्रतिबंधित आयात बंद कर दिया गया है। परिणामस्वरूप, किसी भी इकाई या व्यक्ति को इसे आयात करने के लिए अब सरकारी मंजूरी या विशेष लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह बदलाव आयात प्रक्रियाओं को और अधिक नियंत्रित करेगा।
सरकार का यह आदेश ऐसे समय में आया है जब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार ने हाल ही में देशवासियों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा से बचने और एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील की थी। वर्तमान में, भारत के पास 690 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो लगभग 10 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं की लंबी अवधि की आशंका को देखते हुए सरकार अत्यधिक सतर्कता बरत रही है। विशेष रूप से सोने और चांदी के बढ़ते आयात से इस भंडार पर लगातार दबाव पड़ रहा है।
वित्तीय वर्ष 2026 के आंकड़ों पर गौर करें तो, भारत का सोने का आयात 24.08 प्रतिशत बढ़कर 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में चांदी का आयात 149.48 प्रतिशत की भारी वृद्धि के साथ 12.05 अरब डॉलर हो गया। यह स्पष्ट दर्शाता है कि चांदी का आयात सोने की तुलना में कई गुना अधिक गति से बढ़ा है। सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी व्यापार आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि अप्रैल में चांदी का आयात बढ़कर 411.06 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यह आंकड़ा अप्रैल 2025 में दर्ज 159.85 मिलियन डॉलर की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। भारतीय रुपये के संदर्भ में, अप्रैल 2026 में चांदी का आयात 181.17 प्रतिशत बढ़कर 3,845.51 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में यह 1,367.67 करोड़ रुपये था।
अप्रैल माह के लिए आयात की गई वस्तुओं की मात्रा से संबंधित विस्तृत आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह पता चलता है कि मार्च 2026 में चांदी की आयात मात्रा और मूल्य दोनों ही मार्च 2025 की तुलना में काफी भारी रहे। भारत ने मार्च 2025 में 128,987 किलोग्राम चांदी का आयात किया था, जो मार्च 2026 में 91 प्रतिशत बढ़कर 247,008 किलोग्राम हो गया। इस प्रकार, बढ़ते आयात पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता बन गई है, ताकि विदेशी मुद्रा की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके और देश की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो। इस प्रतिबंध का उद्देश्य गैर-आवश्यक वस्तुओं के आयात को कम करके महत्वपूर्ण संसाधनों को बचाना है।