इंदौर में सड़क हादसों पर लगेगी लगाम, जस्टिस सप्रे ने दिए सख्त निर्देश, हेलमेट-सीट बेल्ट अभियान पर दिया जोर

सड़क पर हर पल मंडराते हादसों के खतरे को कम करने और अनमोल जिंदगियों को बचाने के लिए इंदौर में अब एक बड़ा और सख्त एक्शन प्लान लागू किया जा रहा है। दरअसल इसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाना और यातायात नियमों के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाना है। इस कार्य योजना के

Jun 30, 2026 - 22:30
इंदौर में सड़क हादसों पर लगेगी लगाम, जस्टिस सप्रे ने दिए सख्त निर्देश, हेलमेट-सीट बेल्ट अभियान पर दिया जोर

सड़क पर हर पल मंडराते हादसों के खतरे को कम करने और अनमोल जिंदगियों को बचाने के लिए इंदौर में अब एक बड़ा और सख्त एक्शन प्लान लागू किया जा रहा है। दरअसल इसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाना और यातायात नियमों के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाना है। इस कार्य योजना के तहत हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही, यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। यह सिर्फ जागरूकता और जुर्माने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर और जिले की सड़कों के रखरखाव, गड्ढों की मरम्मत तथा दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स के सुधार कार्यों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इन महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगी। बैठक में जस्टिस सप्रे ने इस बात पर जोर दिया कि हेलमेट और सीट बेल्ट जीवन रक्षा के सबसे सरल और प्रभावी उपाय हैं। इसके बावजूद, आम लोगों में इनके उपयोग का स्तर अभी भी अपेक्षित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल चालान काटने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों को जागरूक कर इसे एक जनआंदोलन का रूप देना होगा। जस्टिस सप्रे ने सभी शासकीय विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से अपील की कि वे सड़क सुरक्षा के संदेश को घर-घर तक पहुंचाएं और प्रत्येक व्यक्ति को “रोड सेफ्टी ब्रांड एम्बेसडर” बनने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।

उच्च गुणवत्ता वाली सड़कें बनाने के निर्देश

वहीं सड़क इंजीनियरिंग और सड़कों की गुणवत्ता पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। जस्टिस सप्रे ने तत्काल प्रभाव से जिले की सड़कों पर मौजूद गड्ढों का सर्वे कराने और बिना किसी देरी के मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को भविष्य में ऐसी उच्च गुणवत्ता वाली सड़कें बनाने के लिए निर्देशित किया, जिनमें गड्ढे बनने की संभावना कम हो और दुर्घटनाजनक ब्लैक स्पॉट्स विकसित न हों। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जिले के कई ब्लैक स्पॉट्स पर सुधार कार्य सफलतापूर्वक किए गए हैं। इन सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जहाँ कुछ स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, कुछ क्षेत्रों में तो दुर्घटनाओं को शून्य तक लाने में भी सफलता मिली है, जो इन प्रयासों की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

यह हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी: जस्टिस सप्रे

वहीं जस्टिस सप्रे ने इस बात पर बल दिया कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस, प्रशासन या न्याय पालिका का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने संवेदनशील दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि सड़क पर किसी घायल व्यक्ति की मदद करने के लिए किसी विशेष पद या अधिकार की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की जरूरत होती है। उन्होंने देश में सड़क दुर्घटनाओं की भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्त की, जहां औसतन हर तीन मिनट में एक व्यक्ति अपनी जान गंवा देता है। इस गंभीर स्थिति को बदलने के लिए सामूहिक और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।

स्वच्छता के बाद सड़क सुरक्षा में भी अव्वल आने का लक्ष्य

इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। अब समय आ गया है कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी इंदौर देश का अग्रणी शहर बने। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठन, मीडिया और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। बैठक में मौजूद सभी संस्थाओं और संगठनों ने सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने तथा यातायात नियमों के पालन को जनआंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प लिया। यह प्रतिबद्धता इंदौर को सुरक्षित सड़कों वाले शहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।