इंदौर नगर निगम के ARO जितेंद्र पांडेय पर लोकायुक्त की रेड, 31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन और 2.53 करोड़ की संपत्ति का दावा

नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी (ARO) जितेंद्र कुमार पांडेय के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। टीम ने एक साथ उनके दो ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की। शुरुआती जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपए की संपत्ति और खर्च का पता चलने की बात कही

Aug 14, 2026 - 10:30
इंदौर नगर निगम के ARO जितेंद्र पांडेय पर लोकायुक्त की रेड, 31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन और 2.53 करोड़ की संपत्ति का दावा

नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी (ARO) जितेंद्र कुमार पांडेय के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। टीम ने एक साथ उनके दो ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की। शुरुआती जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपए की संपत्ति और खर्च का पता चलने की बात कही गई है, जबकि उनकी वैध आय करीब 80 लाख रुपए आंकी गई है।

लोकायुक्त के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडेय नगर निगम में करीब 31 साल से नौकरी कर रहे हैं। पूरे सेवाकाल में वेतन से हुई उनकी अनुमानित आय करीब 80 लाख रुपए बताई गई है। इसके मुकाबले जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपए की संपत्ति और खर्च सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार यह राशि उनकी वैध आय से करीब 1.73 करोड़ रुपए ज्यादा है। शुरुआती गणना में इसे करीब 216.35 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति बताया गया है। हालांकि लोकायुक्त ने साफ किया है कि यह आंकड़े अभी शुरुआती जांच पर आधारित हैं और सर्चिंग पूरी होने के बाद स्थिति और साफ होगी।

लोकायुक्त की रेड में पत्नी के नाम दो बड़ी इमारतें मिलीं

लोकायुक्त की जांच में ARO जितेंद्र पांडेय की पत्नी भावना पांडेय के नाम पर दर्ज संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार आनंद नगर एक्सटेंशन, नवलखा-चितावद इलाके में 40×50 फीट के प्लॉट पर G+3 यानी चार मंजिला इमारत मिली है। इसके निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसी तरह गजाधर नगर, चितावद के गुलमोहर का बगीचा इलाके में भावना पांडेय के नाम एक और G+2 यानी तीन मंजिला इमारत मिली है। इस भवन में हॉस्टल संचालित होने की जानकारी जांच टीम को मिली है। इसके निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

लोकायुक्त इन दोनों इमारतों से जुड़े जमीन के कागजात, निर्माण लागत और दूसरे दस्तावेजों की जांच कर रही है। खास बात यह है कि जांच में सामने आई संपत्तियों में से कुछ परिवार के सदस्यों के नाम पर बताई गई हैं। ऐसे में इनके खरीदने और निर्माण में इस्तेमाल हुए पैसों के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों के मिलान के बाद ही संपत्तियों की वास्तविक कीमत और आय के साथ उनका पूरा हिसाब सामने आएगा।

पत्नी, बेटे और बेटी के नाम गाड़ियां भी जांच के दायरे में

दरअसल लोकायुक्त की शुरुआती जांच सिर्फ मकानों और जमीन तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के अनुसार जितेंद्र पांडेय के परिवार के सदस्यों के नाम पर कई चार पहिया और दोपहिया वाहन खरीदे जाने की जानकारी भी मिली है। इन वाहनों की खरीद और अन्य घरेलू खर्चों को मिलाकर करीब 14 लाख रुपए के व्यय का शुरुआती आकलन किया गया है। शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे लोकायुक्त की अलग-अलग टीमें पांडेय के ठिकानों पर पहुंची थीं। कार्रवाई में डीएसपी सुनील तालान, आनंद चौहान, निरीक्षक आशुतोष मिठास और सचिन पटेरिया समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। टीम संपत्तियों के अलावा बैंक रिकॉर्ड, निवेश, वाहन, निर्माण से जुड़े कागजात और दूसरे वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस

लोकायुक्त पुलिस ने जितेंद्र कुमार पांडेय के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। हालांकि इस कार्रवाई में सामने आई संपत्ति को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं निकला है। जांच एजेंसी दस्तावेजों और संपत्तियों का वैरिफिकेशन करने के बाद अनुपातहीन संपत्ति की अंतिम रकम तय करेगी।