नीतीश कुमार ने MLC पद से इस्तीफा दिया, बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत, सीएम पद को लेकर अटकलें तेज

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह कदम 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में उनकी जीत के बाद संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए उठाया गया है। उनका इस्तीफा बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। बिहार विधान परिषद

Mar 30, 2026 - 14:30
नीतीश कुमार ने MLC पद से इस्तीफा दिया, बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत, सीएम पद को लेकर अटकलें तेज

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह कदम 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में उनकी जीत के बाद संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए उठाया गया है। उनका इस्तीफा बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस्तीफे की पुष्टि की। जानकारी के अनुसार, जनता दल (यूनाइटेड) के एमएलसी संजय गांधी ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास से इस्तीफा पत्र लेकर परिषद सचिवालय में जमा किया।

नीतीश कुमार ने एमएलसी की सदस्यता से इस्तीफा दिया

नीतीश कुमार ने एमएलसी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। बता दें कि वे 16 मार्च को एनडीए के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उनका एमएलसी कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन राज्यसभा सदस्यता के कारण उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। संविधान के अनुसार, संसद के एक सदन का सदस्य बनने पर राज्य विधानमंडल की सदस्यता 14 दिनों के अंदर छोड़नी अनिवार्य होती है। आज 30 मार्च इस समय-सीमा का अंतिम दिन था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कदम उनके दो दशक लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल का अंत कर सकता है।

संवैधानिक प्रावधान

भारतीय संविधान के तहत कोई व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकता है। इस तरह एमएलसी पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार सितंबर 2026 तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। बिहार में बदलते गठबंधन समीकरणों को देखते हुए नीतीश कुमार के इस्तीफे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे या बिहार को नया नेतृत्व मिलेगा। यह घटना राज्य की सियासत में नए राजनीतिक परिदृश्य की दिशा तय कर सकती है और आगामी दिनों में इसके राजनीतिक परिणाम साफ होंगे।