भोपाल के सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर, जर्जर छत के नीचे बारिश में पढ़ने को मजबूर बच्चे

भोपाल के बैरागढ़ इलाके में बारिश के दौरान सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की परेशानी बढ़ गई है। वार्ड क्रमांक-3 की नई बस्ती शासकीय स्कूल में तेज बारिश के बाद पानी भर जाता है। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों और शिक्षकों को घुटनों तक पानी से होकर

Aug 14, 2026 - 16:30
भोपाल के सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर, जर्जर छत के नीचे बारिश में पढ़ने को मजबूर बच्चे

भोपाल के बैरागढ़ इलाके में बारिश के दौरान सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की परेशानी बढ़ गई है। वार्ड क्रमांक-3 की नई बस्ती शासकीय स्कूल में तेज बारिश के बाद पानी भर जाता है।

कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों और शिक्षकों को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ता है। दूसरी ओर एच वार्ड की शासकीय माध्यमिक शाला की इमारत भी लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रही है। यहां छत के कई हिस्सों में छेद हैं और दीवारों में सीलन व टूट-फूट दिखाई देती है।

नई बस्ती स्कूल में घुटनों तक पानी से बढ़ी परेशानी

वार्ड क्रमांक-3 स्थित नई बस्ती शासकीय स्कूल में बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आ रही है। तेज बारिश होने पर स्कूल परिसर और आसपास पानी जमा हो जाता है। स्थानीय स्थिति के अनुसार कई बार पानी घुटनों तक पहुंचने की बात सामने आई है।

ऐसे में बच्चों और शिक्षकों के लिए स्कूल तक पहुंचना आसान नहीं रहता। बच्चों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ता है। बारिश के पानी में सड़क और जमीन की स्थिति साफ दिखाई नहीं देती, जिससे फिसलने या चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।

एच वार्ड के सरकारी स्कूल की छत और दीवारें बदहाल

बैरागढ़ के एच वार्ड स्थित शासकीय माध्यमिक शाला की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। इस स्कूल में करीब 234 बच्चे पढ़ाई करते हैं। बच्चों की संख्या को देखते हुए स्कूल भवन का सुरक्षित और मजबूत होना बेहद जरूरी है, लेकिन भवन के कई हिस्सों में लंबे समय से खराबी दिखाई दे रही है।

स्कूल की दीवारों में सीलन और टूट-फूट है। बारिश के दौरान सबसे बड़ी परेशानी छत से जुड़ी है। छत के कुछ हिस्सों में छेद होने के कारण पानी कक्षाओं के अंदर टपकता है। बारिश के समय बच्चों के सामने पढ़ाई करने के लिए बैठने की जगह भी प्रभावित हो सकती है।

234 बच्चों की पढ़ाई पर बारिश का असर

एच वार्ड के स्कूल में करीब 234 बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों के लिए स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं है, बल्कि दिन का बड़ा हिस्सा यहीं गुजरता है। ऐसे में स्कूल भवन का सुरक्षित होना उनकी शिक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

जब कक्षा में छत से पानी गिरता है तो शिक्षक के लिए पढ़ाना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों को भी अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाने में परेशानी होती है। बारिश की आवाज, पानी से बचने की कोशिश और गीली जगह के कारण कक्षा का सामान्य माहौल बदल जाता है।

1962 से संचालित है स्कूल

एच वार्ड की शासकीय माध्यमिक शाला लंबे समय से क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा दे रही है। बताया गया है कि स्कूल वर्ष 1962 से संचालित हो रहा है। बाद में वर्ष 2007 में नई बिल्डिंग का निर्माण किया गया था।

नई इमारत बने भी कई साल गुजर चुके हैं। समय के साथ किसी भी भवन में मरम्मत की जरूरत पड़ती है। छत, दीवार, फर्श, पानी की निकासी और अन्य हिस्सों की नियमित देखभाल नहीं होने पर भवन धीरे-धीरे खराब होने लगता है।

स्कूल परिसर में घास, फिसलन और कचरे की समस्या

बारिश के बाद स्कूल परिसर में घास तेजी से बढ़ जाती है। पानी और घास के कारण जमीन पर फिसलन बढ़ सकती है। छोटे बच्चे खेलते या चलते समय गिर सकते हैं। इसलिए बारिश के मौसम में स्कूल परिसर की नियमित सफाई और घास की कटाई जरूरी हो जाती है।

इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन के सामने कचरे की समस्या भी है। बताया गया है कि आसपास के कुछ लोग स्कूल परिसर में कचरा फेंक देते हैं। इससे स्कूल का वातावरण खराब होता है और बारिश के दौरान परेशानी और बढ़ सकती है।

बारिश में जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ा

बारिश के मौसम में खाली जगहों, घास और कचरे के आसपास जीव-जंतुओं के आने का खतरा बढ़ जाता है। स्कूल परिसर में अगर घास ज्यादा हो, कचरा जमा हो और पानी रुका रहे तो बच्चों के लिए यह स्थिति और चिंता की वजह बन सकती है।

स्कूल में छोटे बच्चे पढ़ते हैं। वे खेलते समय या परिसर में घूमते हुए ऐसी जगहों तक पहुंच सकते हैं जहां उन्हें खतरे का अंदाजा न हो। इसलिए स्कूल की सफाई केवल सुंदरता के लिए नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत अब जरूरी

बैरागढ़ के इन स्कूलों की स्थिति से यह साफ होता है कि सरकारी स्कूलों के भवनों की नियमित जांच और मरम्मत पर ध्यान देने की जरूरत है। किसी भी भवन में दरार, सीलन, छत से पानी गिरना या प्लास्टर टूटना जैसी समस्या दिखाई दे तो उसे समय रहते ठीक किया जाना चाहिए।

बारिश का मौसम आने से पहले स्कूल भवनों का निरीक्षण किया जाए तो कई समस्याओं का समाधान पहले ही किया जा सकता है। छत की जांच, पानी की निकासी, दीवारों की स्थिति और बिजली की व्यवस्था को देखना जरूरी है।

जलभराव से बच्चों की रोजमर्रा की पढ़ाई प्रभावित

जलभराव का असर केवल स्कूल आने-जाने तक सीमित नहीं रहता। अगर स्कूल परिसर में लंबे समय तक पानी जमा रहे तो बच्चों के लिए सामान्य गतिविधियां भी मुश्किल हो जाती हैं। प्रार्थना, खेल, आवाजाही और कक्षा बदलने जैसी छोटी गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

अगर बारिश लगातार होती है तो समस्या और बढ़ जाती है। बच्चे गीले कपड़ों में स्कूल पहुंचते हैं और उन्हें पूरे समय असुविधा हो सकती है। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति खास तौर पर परेशान करने वाली होती है।

स्कूल प्रबंधन ने विभाग को दी जानकारी

स्कूल के प्रभारी प्राचार्य सीएस मरावी के अनुसार भवन की मरम्मत, जल निकासी और परिसर की सफाई की जरूरत है। स्कूल प्रबंधन की ओर से संबंधित विभाग को समस्याओं की जानकारी दी गई है।

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। हालांकि स्थायी समाधान के लिए भवन की मरम्मत और पानी की निकासी की व्यवस्था को ठीक करना जरूरी होगा।

रवि नाथानी की रिपोर्ट

 

 

 

 

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।