MP में कांग्रेस ने बजट खर्च पर उठाए सवाल, उमंग सिंघार ने कहा “मध्यप्रदेश को भाजपा ने सर्कस बना दिया”
मध्यप्रदेश में वित्तीय प्रबंधन और विकासकार्यों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश को भारतीय जनता पार्टी ने “सर्कस” बना दिया है जहां सरकार “ट्राय एंड एरर” के आधार पर काम कर रही है और इसकी कीमत प्रदेश की जनता चुका रही है। नेता
मध्यप्रदेश में वित्तीय प्रबंधन और विकासकार्यों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश को भारतीय जनता पार्टी ने “सर्कस” बना दिया है जहां सरकार “ट्राय एंड एरर” के आधार पर काम कर रही है और इसकी कीमत प्रदेश की जनता चुका रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार लगातार कर्ज ले रही है, लेकिन बजट का प्रभावी उपयोग करने में विफल रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में सिर्फ 15 दिन शेष हैं, जबकि अब तक मात्र 66.89 प्रतिशत बजट ही खर्च हो सका है और करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये अभी भी खर्च होने बाकी हैं।
कांग्रेस ने सरकार को बजट खर्च और कर्ज के मुद्दे पर घेरा
उमंग सिंघार ने कहा कि एमपी सरकार लगातार कर्ज पर कर्ज ले रही है, लेकिन बजट का सही उपयोग नहीं हो पा रहा और जमीन पर कोई ठोस काम नजर नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष के अंत में सिर्फ 15 दिन बचे हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 66.89 प्रतिशत बजट ही खर्च हुआ है। कांग्रेस नेता ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि मार्च महीने में ही सरकार तीसरी बार 4,100 करोड़ का नया कर्ज उठा रही है। इस महीने में कुल मिलाकर करीब 16,200 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है, जबकि पहले से उपलब्ध बजट तक पूरी तरह खर्च नहीं हो पाया।
बीजेपी पर लगाए आरोप
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ विभागों ने 198 प्रतिशत तक खर्च दिखाया है तो कई विभाग 60-70 प्रतिशत पर ही अटके हुए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इससे साफ है कि न तो कोई स्पष्ट योजना है, न प्राथमिकताएं तय है बल्कि सिर्फ अव्यवस्था का बोलबाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कि किसान आज भी फसल के उचित दाम, खाद और मुआवजे के लिए परेशान हैं। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। आम जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उमंग सिंघार ने सरकार के विकास और खर्च के दावों को “खोखला” बताते हुए कहा कि न तो धन का सही उपयोग हो रहा है और न ही उसका लाभ जनता तक पहुंच रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार उपलब्ध बजट ही खर्च नहीं कर पा रही, तो फिर लगातार कर्ज लेने की क्या जरूरत है। उन्होंने इसे जनता पर आर्थिक बोझ बताते हुए इस सिलसिले पर रोक लगाने की मांग की है।