देवघर में गैस संकट से खुली सिस्टम की पोल, स्कूल के बच्चों और अस्पताल में मरीजों के लिए धुएं में बन रहा खाना

झारखंड के देवघर में एलपीजी गैस की कमी ने स्कूलों, अस्पतालों और सामाजिक संस्थाओं को संकट में डाल दिया है। मिड-डे मील से लेकर सस्ते भोजन केंद्र तक लकड़ी के चूल्हे पर निर्भर हो गए हैं।

Mar 30, 2026 - 22:30

Deoghar: देवघर जिले के बाघमारी गांव के मध्य विद्यालय की रसोई से उठता धुआं सिर्फ खाना पकने का संकेत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोल रहा है, जो कागजों पर तो मजबूत दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत में बिखर जाती है। मध्यान भोजन योजना, जिसे बच्चों के पोषण और शिक्षा की रीढ़ माना जाता है, आज गैस की किल्लत के कारण खुद ही संकट में है।

रसोइया की मजबूरी, सेहत पर भारी पड़ रहा धुआं

करीब 15 वर्षों से सेवा दे रहीं रसोइया नूनो देवी अब गैस के अभाव में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं। लगातार धुएं के संपर्क में रहने से उनकी आंखों में जलन और धुंधलापन बढ़ गया है। डॉक्टर की चेतावनी के बावजूद वे काम कर रही हैं, क्योंकि उनके सामने जिम्मेदारी बड़ी है और विकल्प बेहद सीमित।

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बच्चों की थाली तक पहुंचा संकट

इस संकट का सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है। जहां पहले दोपहर एक बजे भोजन मिल जाता था, अब वही खाना दो से तीन बजे के बीच किसी तरह तैयार हो पाता है। भूख और इंतजार के बीच बच्चों की पढ़ाई और सेहत दोनों प्रभावित हो रही हैं।

अस्पताल और सेवा संस्थान भी जूझ रहे

स्थिति सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है। देवघर सदर अस्पताल परिसर में संचालित श्रील फाउंडेशन, जो वर्षों से महज 10 रुपये में जरूरतमंदों को भोजन देता है, वहां भी पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में यहां भी लकड़ी के चूल्हे का सहारा लिया जा रहा है, जिससे काम धीमा और कठिन हो गया है।

इसी तरह, बाबा बलियासे द्वारा संचालित “बाबूजी का प्यार, शुद्ध आहार” अभियान भी गैस संकट की मार झेल रहा है। यहां रोज सैकड़ों जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन दिया जाता है, लेकिन अब लकड़ी के चूल्हे पर निर्भरता ने सेवा कार्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

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प्रशासन की चुप्पी, ब्लैक में मिल रही गैस

सबसे गंभीर बात यह है कि इतने बड़े संकट के बावजूद प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। जहां एक ओर सरकारी संस्थान गैस के लिए जूझ रहे हैं, वहीं बाजार में सिलेंडर ब्लैक में आसानी से उपलब्ध है। यह स्थिति व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है।

अधिकारियों ने मानी समस्या, समाधान अधूरा

विद्यालय के प्रधानाचार्य तुलसी वर्मा ने बताया कि गैस की कमी की सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार ने भी माना कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित हुई है और वैकल्पिक उपायों पर विचार किया जा रहा है।

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