मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी व्यवस्था पर कांग्रेस का हमला, कुणाल चौधरी बोले “किसानों के नाम पर उत्सव मना रही सरकार, अन्नदाता संकट में”
मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी, भंडारण व्यवस्था और कृषि नीति को लेकर कांग्रेस प्रदेश सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने भोपाल में एक पत्रकार वार्ता में प्रदेश सरकार पर किसानों के हितों के साथ छल, झूठे प्रचार और अव्यवस्थित गेहूं खरीदी प्रणाली चलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि
मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी, भंडारण व्यवस्था और कृषि नीति को लेकर कांग्रेस प्रदेश सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने भोपाल में एक पत्रकार वार्ता में प्रदेश सरकार पर किसानों के हितों के साथ छल, झूठे प्रचार और अव्यवस्थित गेहूं खरीदी प्रणाली चलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के नाम पर “ढोल-ताशे और उत्सव” आयोजित कर रही है, जबकि वास्तविकता में अन्नदाता खेतों और मंडियों में भारी संकट, अपमान और आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अवसर पर मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, प्रवक्ता राहुल राज, रितेश त्रिपाठी एवं सुभाष भी उपस्थित रहे।
सरकार के कृषि उत्सव पर सवाल
कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस वर्ष को “कृषि उत्सव” घोषित किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों के लिए यह समय उत्सव नहीं बल्कि संकट का दौर है। उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापनों में किसानों की आय बढ़ने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि किसान कर्ज और अव्यवस्था से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं 365.11 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन बता रही है, लेकिन केवल लगभग 100 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। ऐसे में शेष उत्पादन का क्या होगा, यह बड़ा सवाल है।
गेंहू खरीदी को लेकर बीजेपी को घेरा
कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र से 78 लाख मीट्रिक टन का कोटा मिलने के बावजूद खरीदी समय पर शुरू नहीं की गई और प्रक्रिया 9 अप्रैल से शुरू हुई। डेढ़ महीने से अधिक समय बाद भी लगभग 73 लाख मीट्रिक टन ही खरीदी हो पाई है। उन्होंने कहा कि 19.4 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है और लगभग 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं पंजीकृत हुआ है, लेकिन खरीदी की धीमी गति के कारण हजारों किसान परेशान हैं।
कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि खरीदी केंद्रों पर किसान कई दिनों तक कतारों में खड़े रहते हैं। कहीं बारदाना (कट्टियों) की कमी बताई जाती है तो कहीं वेयरहाउस भरे होने का बहाना किया जाता है। उन्होंने इसे किसानों को निजी व्यापारियों के हाथों सस्ते दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर करने की स्थिति बताया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 28 मार्च को सोसायटी भुगतान की अंतिम तिथि तय कर किसानों पर 14 से 18 प्रतिशत तक पेनल्टी का बोझ डाला गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हुई।
आंदोलन की चेतावनी
कुणाल चौधरी ने मांग की है कि सरकार तुरंत गेहूं खरीदी की अवधि बढ़ाए, सभी पंजीकृत किसानों की उपज खरीदे, पर्याप्त भंडारण और बारदाना व्यवस्था सुनिश्चित करे तथा समय पर भुगतान करे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।