CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी, जयकारों के साथ रवाना हुई ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’
भोपाल की सुबह पूरी तरह भक्ति और उत्साह के रंग में रंगी नजर आई। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर जैसे ही हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयकारे गूंजे, वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। कोई भगवान शिव के भजन गा रहा था, तो
भोपाल की सुबह पूरी तरह भक्ति और उत्साह के रंग में रंगी नजर आई। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर जैसे ही हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयकारे गूंजे, वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। कोई भगवान शिव के भजन गा रहा था, तो कोई परिवार के साथ इस खास पल को कैमरे में कैद कर रहा था। इसी माहौल के बीच ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’ का पहला जत्था गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के लिए रवाना हुआ।
इस धार्मिक यात्रा को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को उन्होंने त्रिशूल भेंट किया, जिसे शौर्य और सनातन संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा एक बड़ा आयोजन बन गया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए लोग इस यात्रा को अपने जीवन का खास अनुभव बता रहे हैं।
सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026 में दिखा भक्ति का अनोखा उत्साह
‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’ में इस बार कुल 1100 श्रद्धालु शामिल हुए हैं। इनमें भोपाल संभाग से 500 और उज्जैन संभाग से 600 यात्री शामिल बताए गए हैं। स्टेशन परिसर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति गीत गाती नजर आईं, जबकि बुजुर्ग और युवा भगवान शिव के जयकारे लगा रहे थे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिया सांस्कृतिक एकता का संदेश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यात्रा को रवाना करते समय कहा कि यह आयोजन केवल तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि देश के संघर्ष, आस्था और पुनर्निर्माण का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसी यात्राएं समाज को जोड़ने का काम करती हैं। जब अलग-अलग क्षेत्रों के लोग एक साथ धार्मिक यात्रा करते हैं, तो सांस्कृतिक एकता और भाईचारा मजबूत होता है।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास और आस्था से जुड़ाव
सोमनाथ मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। गुजरात के समुद्र किनारे स्थित यह मंदिर सदियों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र रहा है। इतिहास में कई बार इस मंदिर को तोड़ा गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। यही वजह है कि इसे भारत के स्वाभिमान और सनातन संस्कृति का प्रतीक भी कहा जाता है।
संस्कृति विभाग की बड़ी पहल मानी जा रही यात्रा
मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह यात्रा अब एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन का रूप ले चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार ऐसे आयोजन कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को भी फायदा होता है। यात्राएं लोगों को धार्मिक स्थलों से जोड़ती हैं और समाज में सकारात्मक माहौल बनाती हैं।
11 मई को होगा यात्रा का समापन
यह यात्रा 11 मई को सोमनाथ महादेव के दर्शन के बाद समाप्त होगी। श्रद्धालु वहां पूजा-अर्चना करने के बाद वापस अपने शहर लौटेंगे। कई यात्रियों ने कहा कि वे इस अनुभव को जिंदगीभर याद रखेंगे। सरकार और संस्कृति विभाग की ओर से भी यह कोशिश की जा रही है कि भविष्य में और ज्यादा लोगों को ऐसी यात्राओं से जोड़ा जाए।