Iran Israel War: यहां जानें ईरान ने भारत के जहाजों को क्यों दी थी हरी झंडी? विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया सच

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान ने भारत के दो एलपीजी से भरे जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की मंजूरी दे दी थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि यह लगातार कूटनीतिक बातचीत का नतीजा है। इससे उम्मीद जगी है कि फारस की खाड़ी में फंसे बाकी भारतीय जहाजों को भी जल्द सुरक्षित रास्ता मिल सकता है।

Mar 16, 2026 - 15:30
Iran Israel War: यहां जानें ईरान ने भारत के जहाजों को क्यों दी थी हरी झंडी? विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया सच

New Delhi: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की सख्ती के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई थी, जिसमें एलपीजी से लदे भारत के दो जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति मिल गई थी। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, एलपीजी से भरा जहाज शिवालिक आज दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंचने वाला है। वहीं दूसरा जहाज नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों में करीब 92,712 टन एलपीजी लदी हुई है।

ये जहाज उन 24 भारतीय जहाजों में शामिल थे जो मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में फंस गए थे। हालात इतने तनावपूर्ण थे कि ईरान ने पहले साफ कहा था कि वह होर्मुज से तेल की एक बूंद भी गुजरने नहीं देगा। ऐसे माहौल में भारतीय जहाजों को रास्ता मिलना दुनिया के लिए भी चौंकाने वाली खबर बन गया।

एस. जयशंकर ने बताया कैसे मिली मंजूरी

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा खुलासा किया है। वह इन दिनों ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं। वहां उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि भारत लगातार ईरान से बातचीत कर रहा था।

Iran Israel War: ईरान ने अबू धाबी के पास किया ड्रोन अटैक, एक की मौत, उड़ानों पर पड़ा असर

जयशंकर ने कहा, “मैं फिलहाल उनसे बातचीत कर रहा हूं और हमारी बातचीत के कुछ नतीजे सामने आए हैं। अगर संवाद से समाधान निकलता है तो हम उसी रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे। भारत के नजरिए से बेहतर यही है कि हम बातचीत और समन्वय के जरिए समाधान तलाशें।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह की बातचीत से दूसरे देशों को भी फायदा होता है तो दुनिया के लिए यह बेहतर स्थिति होगी।

अभी और जहाजों की उम्मीद

जब जयशंकर से पूछा गया कि क्या यूरोपीय देश भी भारत की तरह इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि हर देश का रिश्ता अपनी विशेषताओं पर आधारित होता है। इसलिए इसकी तुलना सीधे तौर पर दूसरे देशों से करना मुश्किल है। जयशंकर ने यह भी साफ किया कि भारतीय जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई व्यापक व्यवस्था नहीं किया गया है। हर जहाज को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत की जा रही है।

Oscars 2026 में चमके सितारे: लियोनार्डो की फिल्म ने जीते 6 अवॉर्ड, प्रियंका-निक ने रेड कार्पेट पर बिखेरा जलवा

उन्होंने कहा, “यह किसी तरह का एक्सचेंज नहीं है। भारत और ईरान के बीच एक पुराना रिश्ता है और हम इस संघर्ष को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।”

विदेश मंत्री के मुताबिक यह सिर्फ शुरुआत है। फारस की खाड़ी में अभी भी कई भारतीय जहाज फंसे हुए हैं और उनके सुरक्षित मार्ग के लिए बातचीत जारी है। हालांकि दो जहाजों को मिली मंजूरी को एक सकारात्मक और उम्मीद जगाने वाला कदम माना जा रहा है।

MpToday Editor MP Today के पास 27 years का journalism experience है। इस दौरान MP Today ने Madhya Pradesh की कई बड़ी media agencies और news organizations के साथ काम किया है और ground reporting से लेकर editorial analysis तक मजबूत पहचान बनाई है। MP Today की टीम ने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, विकास, crime और public interest news पर लगातार काम किया है। लंबे अनुभव और reliable sources की वजह से MP Today हमेशा accurate, fast और trustworthy news देने के लिए जाना जाता है।