Nepal Flood Tragedy: बलिया के परिवार पर टूटा कहर, मां-बेटा सैलाब में बहे; 40 साल पहले नेपाल गए थे पन्नालाल
रसड़ा के पुरानी मस्जिद के पास रहने वाले पन्नालाल चौरसिया करीब 40 साल पहले रोजगार की तलाश में नेपाल गए थे। उन्होंने नेपाल के त्रिशूली नुवाकोट में अपना ठिकाना बनाया और वहां थोक व फुटकर कपड़ों का कारोबार शुरू किया। समय के साथ कारोबार बढ़ा तो उनका पूरा परिवार भी नेपाल में ही रहने लगा।
बलिया: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक परिवार की खुशियां छीन ली हैं। रसड़ा क्षेत्र के रहने वाले 68 वर्षीय पन्नालाल चौरसिया की पत्नी और बेटा नेपाल के त्रिशूली नुवाकोट में आए जल सैलाब की चपेट में आकर बह गए। हादसे के बाद से दोनों का कोई पता नहीं चल सका है।
परिवार के लोग लगातार उनकी तलाश कर रहे हैं और उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं, इस घटना के बाद बलिया स्थित परिवार में मातम पसरा हुआ है।
नेपाल में 40 साल पहले बस गए थे पन्नालाल
जानकारी के मुताबिक, रसड़ा के पुरानी मस्जिद के पास रहने वाले पन्नालाल चौरसिया करीब 40 साल पहले रोजगार की तलाश में नेपाल गए थे। उन्होंने नेपाल के त्रिशूली नुवाकोट में अपना ठिकाना बनाया और वहां थोक व फुटकर कपड़ों का कारोबार शुरू किया।
समय के साथ कारोबार बढ़ा तो उनका पूरा परिवार भी नेपाल में ही रहने लगा। वर्षों से नेपाल में रह रहा परिवार वहीं की जिंदगी में पूरी तरह रच-बस गया था। किसी ने नहीं सोचा था कि अचानक आए बाढ़ के सैलाब में परिवार के दो सदस्य लापता हो जाएंगे।
पत्नी और 18 वर्षीय बेटे की तलाश जारी
बताया जा रहा है कि नेपाल में आए जल प्रलय के दौरान पन्नालाल की 54 वर्षीय पत्नी जगदरा उर्फ उषा देवी और 18 वर्षीय बेटा राहुल तेज बहाव की चपेट में आ गए।
हादसे के बाद से दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पन्नालाल और उनके रिश्तेदार लगातार दोनों की तलाश में जुटे हुए हैं।
दो बेटियों पर टूटा दुखों का पहाड़
पन्नालाल की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी 24 वर्षीय शिवानी चौरसिया वाराणसी में रहती हैं और उनकी शादी हो चुकी है। वहीं, दूसरी बेटी 28 वर्षीय दीक्षा चौरसिया रसड़ा में कॉस्मेटिक की दुकान चलाती हैं। दीक्षा की शादी समीर से हुई है।
मां और भाई के सैलाब में बहने की खबर मिलने के बाद दोनों बेटियां और पूरा परिवार गहरे सदमे में हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें अभी भी दोनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद है।