US-Iran War: पहले जीत, फिर बात… ट्रंप ने सीजफायर से किया इनकार, NATO-UK को भी सुनाई खरी-खोटी
ईरान के साथ जारी जंग पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि अभी युद्धविराम पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। साथ ही ब्रिटेन की धीमी मदद पर नाराजगी जताई और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर NATO की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बेहद सख्त रुख दिखाया है। व्हाइट हाउस में शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने साफ कहा कि वह फिलहाल युद्धविराम नहीं चाहते। उनका कहना था कि जब विरोधी पक्ष को सैन्य रूप से लगातार कमजोर किया जा रहा हो, तब युद्धविराम का सवाल नहीं उठता।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी और इजरायली कार्रवाई में ईरान की नौसेना, वायुसेना और वायु रक्षा तंत्र को बड़ा नुकसान हुआ है। इसी बातचीत में उन्होंने ब्रिटेन की धीमी प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी जताई और कहा कि अमेरिका को मदद देने के मामले में लंदन को और तेजी दिखानी चाहिए थी।
ट्रंप ने युद्धविराम से क्यों किया इनकार?
ट्रंप के ताजा बयान से साफ है कि वॉशिंगटन फिलहाल सैन्य दबाव कम करने के मूड में नहीं दिख रहा। उन्होंने कहा कि बातचीत संभव है, लेकिन युद्धविराम नहीं। उनका तर्क था कि अमेरिकी लक्ष्य अभी पूरे होने बाकी हैं और ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि ईरान की सैन्य क्षमता को निर्णायक रूप से कमजोर करना ही उनकी प्राथमिकता है।
इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि अमेरिका को अपने अभियान के लिए सहयोगियों के समर्थन की जरूरत नहीं है, हालांकि सहयोगी देशों की निष्क्रियता पर उन्होंने नाराजगी जरूर जताई। इस रुख से साफ है कि जंग के जल्द थमने के संकेत अभी कमजोर हैं, भले ही ट्रंप ने यह भी इशारा दिया हो कि अमेरिकी सैन्य उद्देश्य पूरे होने के बाद इजरायल युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठा सकता है।
NATO पर ट्रंप का गुस्सा
ट्रंप ने ब्रिटेन पर यह कहते हुए निशाना साधा कि अमेरिका को ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों में मदद देने के मामले में यूके को बहुत तेज होना चाहिए था। रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन ने बाद में अमेरिकी बलों को अपने बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी, लेकिन उसने बड़े युद्ध में सीधे शामिल होने से दूरी बनाए रखी। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पहले ही कह चुके हैं कि उनका देश व्यापक युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा, हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों के साथ काम करने को तैयार है।
ट्रंप ने इसी मुद्दे पर NATO की भी आलोचना की और कहा कि कई देश तेल की कीमतों पर चिंता तो जताते हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए आगे नहीं आते। उन्होंने NATO सहयोगियों को कायर तक कहा और यह भी संकेत दिया कि अमेरिका अकेले आगे बढ़ सकता है।
जंग के अंत पर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को मौजूदा संघर्ष का बेहद अहम मोर्चा बताया। उन्होंने कहा कि इस जलडमरूमध्य को सुरक्षित करना कोई असंभव सैन्य काम नहीं है, लेकिन इसके लिए जहाजों और संसाधनों की जरूरत पड़ती है। ट्रंप का कहना था कि यूरोप, जापान, चीन, कोरिया और दूसरे देशों को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए, क्योंकि उनकी ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर करती है।
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सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान और कनाडा जैसे देशों ने सुरक्षित समुद्री आवाजाही के समर्थन की बात कही है, लेकिन उसे संघर्षविराम से जोड़ा है। इसी बीच ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर अमेरिकी सैन्य अभियान अपने लक्ष्य तक पहुंचता है, तो इजरायल युद्ध समाप्त करने पर विचार कर सकता है। यानी ट्रंप के मुताबिक जंग का अंत तभी संभव है, जब वॉशिंगटन को लगे कि उसने अपनी रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है।