अगर पानी रुका तो खत्म हो जाएगा पाकिस्तान… भारत के चिनाब प्रोजेक्ट को लेकर पाक में क्यों बजी खतरे की घंटी
भारत की प्रस्तावित चिनाब जल परियोजना और सिंधु जल संधि (IWT) के निलंबन के बाद पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान के जलवायु विशेषज्ञ ने इस मुद्दे को करोड़ों लोगों की आजीविका और पर्यावरण से जुड़ा बताते हुए परियोजना पर विस्तृत चर्चा की मांग की है।
New Delhi: भारत की प्रस्तावित चिनाब जल परियोजना और सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) से जुड़े घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान में चिंता बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ और लेखक मसूद लोहार ने कहा है कि चिनाब नदी केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका और पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी से जुड़ी जीवनरेखा है। उन्होंने इस परियोजना के संभावित प्रभावों पर विस्तृत वैज्ञानिक और पर्यावरणीय चर्चा की आवश्यकता बताई है।
मसूद लोहार ने अपने विश्लेषण में कहा कि चिनाब नदी हिमालय से निकलने वाली एक महत्वपूर्ण नदी है, जो पानी, तलछट और प्राकृतिक संसाधनों के साथ पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। उनका कहना है कि इस नदी में किसी भी बड़े बदलाव का असर सीमाओं के दोनों ओर पड़ सकता है।
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जल परियोजना को लेकर जताई चिंता
विश्लेषण के अनुसार, भारत की प्रस्तावित योजना में चिनाब नदी के ऊपरी हिस्से के जल का उपयोग कर उसे ब्यास नदी प्रणाली की ओर मोड़ने की संभावना जताई गई है। साथ ही अतिरिक्त पानी को नहरों के माध्यम से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक पहुंचाने की योजना का भी उल्लेख किया गया है। मसूद लोहार का कहना है कि ऐसे किसी भी कदम के पर्यावरणीय, कानूनी और मानवीय प्रभावों का गहराई से अध्ययन किया जाना चाहिए।
सिंधु जल संधि का भी किया जिक्र
मसूद लोहार ने कहा कि चिनाब नदी सिंधु जल संधि के तहत पश्चिमी नदियों में शामिल है, जिनका उपयोग मुख्य रूप से पाकिस्तान के हिस्से में आता है। उनके अनुसार यदि नदी के प्रवाह में बड़े स्तर पर बदलाव किया जाता है, तो इससे संधि की व्याख्या और उसके प्रभावों पर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।
सार्वजनिक चर्चा की मांग
पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने कहा कि किसी भी बड़ी जल परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले उसके डिजाइन, पानी के उपयोग, सुरंग निर्माण, जल भंडारण क्षमता और संभावित पर्यावरणीय प्रभावों पर सार्वजनिक और वैज्ञानिक स्तर पर चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और तकनीकी मूल्यांकन आवश्यक है।
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भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस विषय पर भारत की ओर से कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का मुद्दा पहले से ही संवेदनशील रहा है और भविष्य में इस पर होने वाले निर्णयों पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी रहेगी।