क्या यह सिर्फ एक शख्स की साजिश थी? फ्लाईदुबई मामले में जांच ने खड़े किए बड़े सवाल, सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठीं उंगलियां
फ्लाईदुबई विमान मामले की जांच में एक के बाद एक ऐसे पहलू सामने आ रहे हैं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपी की कथित विचारधारा, एयरलाइन में उसकी हालिया नियुक्ति और संभावित संपर्कों की जांच तेज हो गई है।
New Delhi News: फ्लाईदुबई विमान से जुड़े कथित साजिश मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए सवाल सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियां अब सिर्फ इस बात पर ध्यान नहीं दे रही हैं कि विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के पीछे क्या वजह थी, बल्कि यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी ने यह कदम अकेले उठाया था या उसके पीछे किसी संगठन या दूसरे लोगों की भूमिका थी।
आरोपी के विचारों की भी हो रही जांच
जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, आरोपी सह-पायलट का रवैया कथित तौर पर काफी कट्टरपंथी था। बताया गया है कि वह महिला सहकर्मियों से हाथ मिलाने से भी परहेज करता था। अब एजेंसियां उसके संपर्कों, विचारधारा और पिछले व्यवहार की जानकारी जुटा रही हैं।
इस्राइली मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरोपी हाल के वर्षों में एक ऐसे चरमपंथी प्रचारक के प्रभाव में था, जो धार्मिक आधार पर आत्मघाती हमलों को बढ़ावा देने की बात करता था। इसी वजह से जांच का दायरा अब संभावित वैचारिक और संगठित मदद तक पहुंच गया है।
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नौ महीने पहले ही शुरू किया था काम
रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने फ्लाईदुबई में करीब नौ महीने पहले ही काम शुरू किया था। यही वजह है कि जांचकर्ता इस पहलू को भी खंगाल रहे हैं कि एयरलाइन में उसकी नियुक्ति सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा थी या इसके पीछे कोई दूसरी मंशा थी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विमान को किसी खास स्थान की ओर ले जाने की योजना थी या नहीं। कुछ आशंकाओं में जॉर्डन का रेगिस्तान, सैन्य ठिकाने और दूसरे संवेदनशील लक्ष्य शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इन संभावनाओं की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस मामले ने विमानन सुरक्षा से जुड़े एक पुराने नियम के पालन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, जिन देशों के इस्राइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, उनके पायलटों के तेल अवीव जाने वाली उड़ानों में काम करने पर प्रतिबंध से जुड़ी व्यवस्था मौजूद थी।
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ओमान के साथ इस्राइल के औपचारिक संबंध नहीं हैं। इसके बावजूद रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ओमानी पायलटों ने पिछले कुछ वर्षों में तेल अवीव के लिए उड़ानें संचालित कीं। सुरक्षा एजेंसियों ने एयरलाइंस को नियमों की जानकारी दी थी, लेकिन उसके पालन की जिम्मेदारी काफी हद तक एयरलाइंस पर छोड़ दी गई थी। फ्लाईदुबई मामले के बाद सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों की समीक्षा शुरू होने की बात सामने आई है। सरकार ने हवाई यात्रा से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं।