सैलरी के आधार पर तय नहीं होगा OBC क्रीमी लेयर, MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अधिकारियों को निर्देश जारी
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए राहत की खबर सामने आई है। गुरुवार को क्रीमी लेयर पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है सिर्फ सैलरी के आधार पर ओबीसी की क्रीमी लेयर तय नहीं हो सकती। नर्मदापुरम की याचिकाकर्ता रागिनी […]
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए राहत की खबर सामने आई है। गुरुवार को क्रीमी लेयर पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है सिर्फ सैलरी के आधार पर ओबीसी की क्रीमी लेयर तय नहीं हो सकती।
नर्मदापुरम की याचिकाकर्ता रागिनी राठौर की ओर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने क्रीमी लेयर तय करने के लिए संबंधित व्यक्ति की सेवा श्रेणी, नियुक्ति के समय पद, प्रमोशन की उम्र और सामाजिक स्थिति पर भी विचार करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला?
रागिनी के जिला जज पिता की सैलरी करीब 16 लाख रुपये सालाना थी। जिसे प्रशासन ने ओबीसी की क्रीमी लेयर में शामिल बताकर ओबीसी का जाति प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया था। जिसके बाद रागिनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और याचिका दायर की। सीनियर वकील आदित्य सांघी की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है ।
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के पिता को 40 साल की शासकीय सेवा के बाद प्रमोशन मिला था। जिसके बाद वो क्लास टू से क्लास वन अधिकारी बने। ऐसे में हाईकोर्ट ने कहा कि, “सिर्फ मौजूदा वेतन को क्रीमी लेयर तय के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।”
संबंधित अधिकारियों को 6 सप्ताह का समय दिया
हाईकोर्ट ने अशोकनगर के संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के ओबीसी जाति प्रमाण पत्र के आवेदन पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। इस काम के लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है।
वंदना झा की रिपोर्ट