सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी वन्यजीव सप्ताह की बधाई, कहा “प्रोजेक्ट चीता की सफलता से मिली MP को नई पहचान”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर प्रदेशवासियों और वन संरक्षण से जुड़े कर्मचारियों को बधाई दी हैं। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण ने मध्यप्रदेश में वन पर्यटन को बढ़ावा दिया है और प्रोजेक्ट चीता की सफलता ने प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को नई पहचान दी है। उन्होंने वन्यजीवों के सुरक्षित आवास […]
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर प्रदेशवासियों और वन संरक्षण से जुड़े कर्मचारियों को बधाई दी हैं। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण ने मध्यप्रदेश में वन पर्यटन को बढ़ावा दिया है और प्रोजेक्ट चीता की सफलता ने प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को नई पहचान दी है। उन्होंने वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए सामूहिक भागीदारी की जरूरत बताई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में चीतों के सफल पुनर्स्थापन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से मिली यह सराहना वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है। उन्होंने प्रोजेक्ट चीता की सफलता का श्रेय वनकर्मियों, अधिकारियों, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के समर्पित प्रयासों को दिया।
पीएम मोदी ने वन्यजीव संरक्षण की उपलब्धियों का उल्लेख किया
सीएम मोहन यादव ने कहा कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना जरूरी है। संरक्षण के इन प्रयासों से वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मध्यप्रदेश में वन पर्यटन को भी नई दिशा और गति मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन्यजीव सप्ताह पर जारी संदेश में पिछले एक दशक में भारत की वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी उपलब्धियों का उल्लेख किया है। प्रधानमंत्री ने प्रोजेक्ट चीता को इसका प्रमुख उदाहरण बताया। इसके अलावा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, गैंडा, घड़ियाल, स्लॉथ बियर, नदी डॉल्फिन और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया है।
बिग कैट प्रजातियों के संरक्षण पर जोर
प्रधानमंत्री के संदेश में इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस के जरिए बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण में भारत की भूमिका का उल्लेख किया गया। इसमें बाघ, शेर, तेंदुआ और जगुआर जैसी प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े अनुभवों को साझा करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। अपने संदेश में उन्होंने वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए उनके आवासों के बीच बेहतर संपर्क और वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण को जरूरी बताया गया। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर लगातार काम किए जाने की बात कही गई है।
वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए समय पर सूचना, त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और राज्यों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया।