BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 के लिए तैयार भोपाल, कई देशों के संस्कृति मंत्री और कलाकार होंगे शामिल, भारत देगा वैश्विक एकता का संदेश

भोपाल एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने जा रहा है। दरअसल 5 से 8 अगस्त तक आयोजित होने वाले BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 में कई देशों के संस्कृति मंत्री, अधिकारी और कलाकार शामिल होंगे। वहीं इस आयोजन के जरिए भारत सांस्कृतिक कूटनीति, वैश्विक सहयोग और अपनी समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने

Jul 29, 2026 - 22:30
BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 के लिए तैयार भोपाल, कई देशों के संस्कृति मंत्री और कलाकार होंगे शामिल, भारत देगा वैश्विक एकता का संदेश

भोपाल एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने जा रहा है। दरअसल 5 से 8 अगस्त तक आयोजित होने वाले BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 में कई देशों के संस्कृति मंत्री, अधिकारी और कलाकार शामिल होंगे। वहीं इस आयोजन के जरिए भारत सांस्कृतिक कूटनीति, वैश्विक सहयोग और अपनी समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। सम्मेलन के दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रम, विचार-विमर्श और साझेदारी से जुड़े सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।

दरअसल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को इस बड़े आयोजन के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है। सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ-साथ कुछ आमंत्रित देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य संस्कृति के जरिए देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाना, कला और विरासत के संरक्षण पर चर्चा करना तथा भविष्य में सांस्कृतिक सहयोग के नए रास्ते खोलना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि यह देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का भी अहम माध्यम बनते हैं।

किन देशों की होगी भागीदारी?

दरअसल इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, इथियोपिया, क्यूबा, थाईलैंड और बेलारूस समेत कई देशों के संस्कृति मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि अपने यहां की सांस्कृतिक नीतियों, विरासत संरक्षण और रचनात्मक उद्योगों से जुड़े अनुभव साझा करेंगे। सम्मेलन में कई द्विपक्षीय बैठकों की भी संभावना है, जहां सांस्कृतिक आदान-प्रदान, संग्रहालयों के सहयोग, पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और युवा कलाकारों के लिए नए अवसरों पर चर्चा होगी।

इस आयोजन का एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि तेजी से बदलती दुनिया में संस्कृति को विकास और सामाजिक समरसता का मजबूत आधार बनाया जाए। भारत लंबे समय से “वसुधैव कुटुंबकम” और सांस्कृतिक विविधता की भावना को बढ़ावा देता रहा है। ऐसे में भोपाल में होने वाला यह सम्मेलन भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यटन और सांस्कृतिक निवेश के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। राज्य सरकार और आयोजन समिति ने प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत, सुरक्षा और कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनेंगी आकर्षण का केंद्र

दरअसल सम्मेलन में केवल औपचारिक बैठकें ही नहीं होंगी, बल्कि विभिन्न देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति की झलक भी पेश करेंगे। मिस्र का लोक कलाकार दल, इंडोनेशिया के संगीत और नृत्य कलाकार, रूस का फोक ऑर्केस्ट्रा, दक्षिण अफ्रीका का जमाली ग्रुप और ब्राजील के कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को खास बनाएंगे। इन प्रस्तुतियों के जरिए अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराएं और कला की विविधता देखने को मिलेगी।

भारत की ओर से भी शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक कला की प्रस्तुतियां आयोजित किए जाने की तैयारी है, जिससे विदेशी प्रतिनिधियों को भारतीय संस्कृति की विविधता का अनुभव मिलेगा। पर्यटन और संस्कृति से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक साबित होते हैं। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार को इससे बढ़ावा मिलता है। साथ ही, भोपाल और मध्य प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान मिलने की उम्मीद भी बढ़ जाती है।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।