अलविदा ‘AI’, स्वागत है ‘Super Intelligence’ का: ट्रंप का टेक कंपनियों के लिए नया सुरक्षा चक्र तैयार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में Google, OpenAI, Meta, Nvidia जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ “Joint Commitment on Frontier Responsibilities” नाम के एक नए समझौते की घोषणा की है।
New Delhi: दुनिया में AI के बढ़ते इस्तेमाल और उससे जुड़े जोखिमों के बीच अमेरिका में एक बड़ा कदम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी टेक और AI कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक नए समझौते की घोषणा की है। इसे कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं, बल्कि “मोरली बाइंडिंग” यानी नैतिक रूप से पालन करने वाली प्रतिबद्धता बताया गया है।
AI की जगह अब ‘Super Intelligence’ नाम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI को लेकर नई पहल की घोषणा की है। व्हाइट हाउस में टेक और AI कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद एक समझौते की जानकारी सामने आई। इस समझौते को “Joint Commitment on Frontier Responsibilities” नाम दिया गया है। इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने सरकारी कामकाज में “Artificial Intelligence” की जगह “Super Intelligence” या “SI” शब्द के इस्तेमाल की दिशा में भी कदम उठाया है।
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बड़ी टेक कंपनियों ने समझौते पर जताई सहमति
इस बैठक में अमेरिका की कई बड़ी टेक और AI कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए। इनमें Google, OpenAI, Meta, Anthropic, Nvidia और xAI जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे। इन कंपनियों ने एडवांस AI सिस्टम के विकास और इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा उपाय मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। रिपोर्टों के मुताबिक, समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI मॉडल अपनी तय सीमाओं के भीतर काम करें और किसी तकनीकी सिस्टम तक अनधिकृत तरीके से पहुंच न बनाएं।
समझौते में सुरक्षा की चार परतें
इस समझौते में AI की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर निगरानी की बात कही गई है। कंपनियों से मजबूत इंटरनल कंट्रोल सिस्टम बनाने को कहा गया है। इसके बाद एक आंतरिक टीम इन सुरक्षा उपायों की निगरानी करेगी। तीसरे स्तर पर स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर या मूल्यांकनकर्ता AI सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करेंगे। चौथे स्तर पर कंपनी के बोर्ड की एक स्वतंत्र समिति इन रिपोर्टों और सुधार की प्रक्रिया पर नजर रखेगी।
साइबर और बायो सिक्योरिटी पर भी नजर
समझौते में AI के संभावित खतरों को लेकर साइबर सुरक्षा, बायो सिक्योरिटी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके AI मॉडल अनजाने में किसी तकनीकी सिस्टम में घुसपैठ न करें और सुरक्षा से जुड़ी किसी समस्या का पता चलने पर उसे जल्द ठीक किया जाए।
कानूनी कानून नहीं, स्वैच्छिक प्रतिबद्धता
इस समझौते की एक अहम बात यह है कि यह फिलहाल कानूनी रूप से बाध्यकारी कानून नहीं है। इसे स्वैच्छिक समझौते के तौर पर पेश किया गया है। ट्रंप ने इसे “मोरली बाइंडिंग” बताया, जबकि रिपोर्टों में इसे कंपनियों की ओर से AI के स्व-नियमन यानी self-regulation की प्रतिबद्धता बताया गया है। समझौते में भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन उपायों को कानून या नियमों का हिस्सा बनाने की संभावना का रास्ता भी खुला रखा गया है।
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AI की रफ्तार और सुरक्षा के बीच संतुलन पर चर्चा
AI तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है और इसके साथ सुरक्षा को लेकर भी दुनियाभर में चर्चा हो रही है। अमेरिका में भी यह सवाल उठ रहा है कि AI कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी किस तरह होनी चाहिए। ट्रंप प्रशासन की इस पहल में फिलहाल कंपनियों के अपने सुरक्षा सिस्टम, बाहरी ऑडिट और बोर्ड स्तर की निगरानी पर जोर दिया गया है। आने वाले समय में इन उपायों को लेकर और नियम बनते हैं या नहीं, इस पर नजर रहेगी।