तालिबान के नए शादी फरमान ने लड़कियों की जिंदगी बनाई नरक, जानिए पूरा मामला
अफगानिस्तान में तालिबान के नए शादी नियमों को लेकर विवाद गहरा गया है। कम उम्र में विवाह, तलाक और महिलाओं की स्वतंत्रता से जुड़े प्रावधानों पर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।
New Delhi: अफगानिस्तान में तालिबान शासन के नए शादी नियमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहरा गई है। मानवाधिकार संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि नए नियम महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता पर एक और बड़ा प्रहार हैं। आलोचकों का दावा है कि इन नियमों ने महिलाओं के लिए सामाजिक और पारिवारिक जीवन को और अधिक कठिन बना दिया है।
कम उम्र में विवाह को लेकर बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान की व्याख्या के तहत कुछ मामलों में लड़कियों की शादी कम उम्र में कराए जाने को लेकर बहस छिड़ गई है। खबरों में दावा किया गया है कि 9 वर्ष की बच्ची के विवाह को भी कुछ परिस्थितियों में मान्यता दी जा सकती है, जबकि 16 वर्ष की आयु तक विवाह को लेकर अलग-अलग धार्मिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं। इस मुद्दे पर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है।
तलाक के नियमों पर भी सवाल
नए नियमों में तलाक संबंधी प्रावधानों को लेकर भी विवाद बढ़ा है। आलोचकों का कहना है कि महिलाओं के लिए तलाक हासिल करना पहले की तुलना में और अधिक कठिन हो सकता है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, महिलाओं को वैवाहिक अधिकारों और कानूनी सुरक्षा प्राप्त करने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अगर कोई महिला हिंसक शादी से पीछा छुड़ाना चाहती है तो उसे खोला प्रक्रिया के तहत खुद को आजाद कराने के लिए पैसे देने पड़ेंगे। इसके लिए पति को मुहमांगी रकम तक देनी पड़ सकती है।
पुरुषों के अधीन महिलाओं की भूमिका पर बहस
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नए नियम महिलाओं को पुरुष अभिभावकों के अधीन रखने की सोच को बढ़ावा देते हैं। उनका कहना है कि महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी पहले से ही सीमित है, ऐसे में विवाह संबंधी नए प्रतिबंध उनकी स्थिति को और कमजोर कर सकते हैं।
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पहले से कई प्रतिबंध झेल रहीं महिलाएं
तालिबान के सत्ता में आने के बाद महिलाओं की उच्च शिक्षा, कई सरकारी नौकरियों और सार्वजनिक गतिविधियों में भागीदारी पर पहले ही अनेक प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। अब शादी और पारिवारिक जीवन से जुड़े नए नियमों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ा दी है।
वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।