अमेरिकी सेना को भारी झटका: ईरान से 40 दिनों की जंग में नष्ट हुए 42 सैन्य विमान, F-35 स्टील्थ फाइटर भी हुआ शिकार

कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के साथ 40 दिनों के युद्ध में अमेरिकी सेना के 42 विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसमें पहली बार पांचवीं पीढ़ी का F-35 स्टील्थ फाइटर जेट भी ईरानी मिसाइल का शिकार बना है।

May 22, 2026 - 09:30
अमेरिकी सेना को भारी झटका: ईरान से 40 दिनों की जंग में नष्ट हुए 42 सैन्य विमान, F-35 स्टील्थ फाइटर भी हुआ शिकार

Washington: अमेरिका की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की एक हालिया और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ चले 40 दिनों के भीषण युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को आसमान में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। युद्ध के दौरान अमेरिका के 42 सैन्य विमान या तो पूरी तरह नष्ट हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें अमेरिका का सबसे अत्याधुनिक और अजेय माना जाने वाला पांचवीं पीढ़ी का F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट भी शामिल है। रिपोर्ट के गहन विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि अमेरिका के ज्यादातर अत्याधुनिक विमान युद्ध के शुरुआती दौर में नहीं, बल्कि जंग के आखिरी दिनों में ईरानी हमलों का शिकार हुए।

इन अमेरिकी विमानों और ड्रोनों को बनाया निशाना

इस युद्ध में अमेरिकी बेड़े को हुए नुकसान की सूची काफी लंबी और चिंताजनक है। ईरान ने अपनी रणनीति से अमेरिका के कई महत्वपूर्ण हवाई हथियारों को तबाह कर दिया, जिनमें शामिल हैं:

  • F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट: 1 विमान (क्षतिग्रस्त)
  • एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट: 4 विमान
  • ए-10 थंडरबोल्ट-II अटैक एयरक्राफ्ट: 1 विमान
  • केसी-135 स्ट्रेटोटैंकर रिफ्यूल एयरक्राफ्ट: 7 विमान
  • ई-3 सेंट्री अवॉक्स (AWACS): 1 विमान
  • एमसी-130जे कमांडो II स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट: 2 विमान
  • एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन II हेलिकॉप्टर: 1 हेलिकॉप्टर
  • एमक्यू-9 रीपर ड्रोन: 24 ड्रोन
  • एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन: 1 ड्रोन

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शुरुआती झटके और ‘फ्रेंडली फायर’ की घटनाएं

अमेरिकी विमानों को पहला बड़ा झटका युद्ध की शुरुआत में ही लग गया था। 2 मार्च को अमेरिकी सेंट्रल कमान ने पुष्टि की थी कि कुवैत के ऊपर तीन F-15E विमान मार गिराए गए। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इसे ‘फ्रेंडली फायर’ यानी अपनी ही सेना की गलती से हुई गोलीबारी का नतीजा बताया। इस घटना में चालक दल के सभी छह सदस्य सुरक्षित बाहर निकल गए थे।

इसके बाद 5 अप्रैल को ईरान के ऊपर चल रहे एक ऑपरेशन के दौरान चौथा F-15E स्ट्राइक ईगल विमान ईरानी सेना की जद में आ गया। इसके क्रू को बचाने के लिए चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दो MC-130J कमांडो II विमानों को भी अमेरिकी सेना को खुद ही नष्ट करना पड़ा, क्योंकि वे आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं रह गए थे।

अजेय F-35 पर हमला और ईरान का ‘प्रोडक्ट-358’

इस पूरी जंग में अमेरिका को सबसे बड़ा रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक झटका 19 मार्च को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान लगा। इतिहास में पहली बार किसी दुश्मन देश ने अमेरिका के F-35A स्टील्थ फाइटर जेट को हवा में निशाना बनाने में कामयाबी हासिल की। हालांकि, यह विमान एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करने में सफल रहा, लेकिन इसका क्षतिग्रस्त होना अमेरिकी तकनीक पर बड़ा सवाल उठा गया।

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रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान ने इस फाइटर जेट को गिराने के लिए ‘प्रोडक्ट-358’ (SA-67) नामक मिसाइल-ड्रोन हाइब्रिड सिस्टम का इस्तेमाल किया था। यह एक कम लागत वाली ‘लॉइटरिंग सरफेस-टू-एयर मिसाइल’ है, जो हवा में गश्त लगाकर खुद ही लक्ष्य को ढूंढकर हमला करती है। इसके अलावा, ईरान ने मीडियम रेंज की ‘थर्ड खोरदाद’ मिसाइल प्रणाली और MANPADS का भी बखूबी इस्तेमाल कर अमेरिकी विमानों को आसमान से जमीन पर ला पटका।

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