इंदौर ‘पॉकेट गवाह’ मामले में सख्त कार्रवाई, खजराना के तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा का डिमोशन, तीन साल के लिए बने सब-इंस्पेक्टर

इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर में चर्चित ‘पॉकेट गवाह’ मामले में गुरुवार को एक बड़ी विभागीय कार्रवाई हुई है। खजराना थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। जिसके बाद इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बड़ा फैसला लिया है। पॉकेट गवाह मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर

Aug 6, 2026 - 16:30
इंदौर ‘पॉकेट गवाह’ मामले में सख्त कार्रवाई, खजराना के तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा का डिमोशन, तीन साल के लिए बने सब-इंस्पेक्टर

इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर में चर्चित ‘पॉकेट गवाह’ मामले में गुरुवार को एक बड़ी विभागीय कार्रवाई हुई है। खजराना थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। जिसके बाद इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बड़ा फैसला लिया है। पॉकेट गवाह मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर थाना प्रभारी दिनेश वर्मा का डिमोशन कर उन्हें सब-इंस्पेक्टर (एसआई) बना दिया गया है। यह डिमोशन अगले तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा।

बता दें कि दिनेश वर्मा 31 अगस्त 2020 से 2 अगस्त 2023 तक खजराना थाने में थाना प्रभारी पद पर पदस्थ रहे। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि खजराना थाने में दर्ज अनेक मामलों की कार्रवाई के दौरान बार-बार दो व्यक्तियों को पंच और गवाह बनाया गया। जांच में पता चला कि इरशाद पुत्र अब्दुल हकीम को 742 मामलों में गवाह बनाया गया जबकि नवीन पुत्र रामचंद्र चौहान को 504 मामलों में गवाह के रूप में शामिल किया गया।

जांच में यह भी पाया गया कि हत्या, लूट और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में भी लगातार इन्हीं तथाकथित ‘पॉकेट गवाहों’ का उपयोग किया गया, जिससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

दिनेश वर्मा से मांगा गया था स्पष्टीकरण, नहीं दिया कोई जवाब

जानकारी अनुसार, मामले में पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विभागीय जांच के दौरान दिनेश वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया था लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया था। जिस कारण दिनेश वर्मा को तीन साल के लिए थाना प्रभारी पद से डिमोट कर उनको सब इंस्पेक्टर बनाया गया है।

इससे पहले भी हो चुकी है ऐसी कई कार्रवाई

खास बात यह है कि पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के कार्यकाल में विभागीय अनुशासन को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले विजय नगर थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी रवींद्र सिंह गुर्जर और अजय वर्मा को भी डिमोशन कर एसआई बनाया जा चुका है। हाल ही में खजराना थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक (कार्यवाहक) कमल सिंह गुर्जवार को करीब 400 दिन तक एक शिकायत लंबित रखने के मामले में डिमोशन कर आरक्षक बना दिया गया।

किसने की मामले की जांच?

इस मामले की जांच तत्कालीन सीएसपी जयंत राठौर ने की थी। जांच पूरी होने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को सौंपी थी। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई। जिसके बाद अब उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें इंस्पेक्टर पद से डिमोट कर सब-इंस्पेक्टर बनाया गया है।