92% घट गए थे रजिस्ट्रेशन फिर भी नहीं पिघले ट्रंप, जानिए 1 लाख डॉलर शुल्क पर क्या आया अंतिम अपडेट
डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर का भारी शुल्क एक साल के लिए बढ़ा दिया है। इस फैसले और सख्त जांच का सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों पर पड़ेगा। जानिए पूरा विवरण।
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी कुशल कर्मचारियों को अमेरिका लाने वाली कंपनियों पर लगने वाले 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) के भारी-भरकम शुल्क को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी बयान के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि 2025 में लागू किए गए इस सख्त नियम के कारण विदेशी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के एच-1बी पंजीकरण में 92 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इस अवधि को एक वर्ष और बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी स्नातकों और स्थानीय कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसरों को सुरक्षित रखना है।
भारतीय पेशेवरों और आईटी सेक्टर पर सीधा प्रभाव
अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी वर्ग भारतीय नागरिक और भारत की दिग्गज आईटी कंपनियां रही हैं। भले ही यह नया शुल्क उन छात्रों पर लागू नहीं होता जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में हैं या जो अपने मौजूदा वीजा का नवीनीकरण (रिन्यूअल) करा रहे हैं, लेकिन नई भर्तियों पर लगने वाली इस भारी लागत से भारतीय आईटी कंपनियों का बजट बुरी तरह प्रभावित होगा। इसके अलावा, अमेरिकी श्रम विभाग अब नियोक्ताओं के पुराने आवेदनों की गहन समीक्षा भी करेगा, जिससे जांच की प्रक्रिया और अधिक सख्त हो जाएगी।
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अमेरिकी अर्थव्यवस्था और हेल्थकेयर पर भी पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कड़े फैसले का नुकसान खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी झेलना पड़ सकता है। सिर्फ आईटी ही नहीं, बल्कि अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे लगभग 16,000 भारतीय मूल के डॉक्टर, नर्सें और वित्तीय संस्थान भी इस फैसले की ज़द में आएंगे।
कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां अब भारत या वैंकूवर (कनाडा) जैसे विदेशी केंद्रों में काम आउटसोर्स करने पर मजबूर हो सकती हैं। फिलहाल यह मामला अमेरिकी अदालतों में भी लंबित है, लेकिन इस फैसले ने वैश्विक जॉब मार्केट में हलचल तेज कर दी है।