सब्सिडी के बोझ तले दबा ईरान: अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बीच सरकार का ईंधन पर बड़ा फैसला, जानें क्या

ईरान में 8 सितंबर 2026 से नया पेट्रोल नियम लागू हो रहा है। अमरीकी प्रतिबंधों और आर्थिक संकट के बीच 110 लीटर से अधिक खपत पर कीमतें दोगुनी की गईं। आम नागरिकों के शुरुआती कोटे पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ज्यादा इस्तेमाल महंगा होगा।

Sep 7, 2026 - 09:30
सब्सिडी के बोझ तले दबा ईरान: अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बीच सरकार का ईंधन पर बड़ा फैसला, जानें क्या

Tehran: दुनिया के सबसे सस्ते पेट्रोल वाले देश ईरान में अब ईंधन का बेतहाशा इस्तेमाल महंगा पड़ने वाला है। अमेरिकी प्रतिबंधों, युद्ध के हालातों और गहराते आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

सरकार 8 सितंबर 2026 से 110 लीटर से अधिक पेट्रोल का इस्तेमाल करने वाले चालकों के लिए कीमतें बढ़ाने जा रही है। सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी के अनुसार, यह कदम देश में उपजे ऊर्जा संकट और वित्तीय दबाव से निपटने के लिए उठाया गया है।

तीन स्लैब में बंटी नई दरें

सरकार ने आम नागरिकों को महंगाई के सीधे झटके से बचाने के लिए तीन-स्तरीय कोटा व्यवस्था लागू की है:

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पहला कोटा (0 से 60 लीटर): इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह पहले की तरह 15,000 रियाल (1,500 तोमन) प्रति लीटर मिलेगा।
दूसरा कोटा (61 से 110 लीटर): यह भी पुरानी दर यानी 30,000 रियाल (3,000 तोमन) प्रति लीटर पर ही रहेगा।
तीसरा कोटा (110 लीटर से अधिक): 110 लीटर की सीमा पार होते ही पेट्रोल की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 100,000 रियाल (10,000 तोमन) प्रति लीटर हो जाएगी।

प्रतिबंध, रिफाइनिंग संकट और सीमा पार तस्करी

विशाल तेल भंडार होने के बावजूद ईरान अपनी सीमित रिफाइनिंग क्षमता और घरेलू मांग में भारी उछाल के कारण ईंधन की कमी झेल रहा है। पड़ोसी देशों के मुकाबले पेट्रोल अत्यधिक सस्ता होने की वजह से सीमा पार बड़े पैमाने पर तेल की तस्करी होती है, जिससे सरकारी खजाने को तगड़ा नुकसान पहुंच रहा था। भारी सब्सिडी जारी रखना अब सरकार के लिए मुमकिन नहीं रह गया था।

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2019 के विरोध प्रदर्शनों से लिया सबक

ईरान में पेट्रोल की दरें बढ़ाना हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। साल 2019 में जब ईंधन के दाम अचानक बढ़ाए गए थे, तो पूरे देश में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे। उसी इतिहास से सबक लेते हुए सरकार ने इस बार एकमुश्त बढ़ोतरी के बजाय केवल अत्यधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को निशाने पर लिया है, ताकि आम जनता पर बोझ न पड़े और देश में राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।

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