कमलनाथ ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, कहा “भारतीय लोकतंत्र सबसे संकटकालीन दौर में”
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने देश की निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली लगातार संदिग्ध होती जा रही है और अब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने आयोग के भीतर चल रहे मतभेदों को स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, तीन […]
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने देश की निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली लगातार संदिग्ध होती जा रही है और अब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने आयोग के भीतर चल रहे मतभेदों को स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में से दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने तथा चुनावी डेटा से जुड़े फैसलों को लेकर थीं।
कमलनाथ ने चुनाव आयोग पर किए सवाल
कमलनाथ ने इस रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि दो चुनाव आयुक्तों ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर उन्हें अंधेरे में रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आयुक्तों ने नए और युवा मतदाताओं के सामने आने वाली परेशानियों पर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव का भी जिक्र किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े इस फॉर्म में किए गए बदलाव को दोनों चुनाव आयुक्तों ने अनधिकृत और गैरकानूनी बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के बदलाव से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के सामने अनावश्यक परेशानी खड़ी हो सकती है। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं से यह सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग में फैसले सामूहिक रूप से लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले ही सारे फैसले ले रहे हैं।
एसआईआर को लेकर भी निशाना
एसआईआर को लेकर भी कमलनाथ ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 13 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से काटे जा चुके हैं। वहीं, रिपोर्ट में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम कम होने की जानकारी दी गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी ने सबसे पहले चुनाव आयोग के काम में पारदर्शिता की कमी और वोट चोरी का मुद्दा तथ्यों के साथ उठाया था। उन्होंने कहा कि अब आयोग के भीतर से सामने आई आपत्तियां भी निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित करने की है, वही अब ऐसी प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहा है जो जनविरोधी और सत्ताधारी दल के अनुकूल है। कमलनाथ ने कहा कि इस रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय लोकतंत्र अपने सबसे संकटकालीन दौर में पहुँच गया है।
देश की निर्वाचन प्रक्रिया बुरी तरह संदिग्ध होती जा रही है। अब जो रिपोर्ट सामने आई है उससे पता चलता है कि 3 में से 2 चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीने में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के एकतरफा फैसलों पर आधिकारिक रूप से आपत्ति जतायी है।
दो चुनाव आयुक्तों ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने… pic.twitter.com/7XfxBudIZd
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) September 23, 2026