मध्यप्रदेश के किसानों पर 1.70 लाख करोड़ का कर्ज, उमंग सिंघार ने बीजेपी के “किसान हितैषी मॉडल” पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार ने मध्यप्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। उन्होंने कहा कि “केंद्र सरकार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार ने मध्यप्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “केंद्र सरकार के आंकड़े खुद बता रहे हैं, देश के किसानों पर करीब 32.65 लाख करोड़ का कर्ज है, जबकि मध्यप्रदेश के किसानों पर ही लगभग 1.70 लाख करोड़ का बोझ है।” कांग्रेस नेता ने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि बीजेपी सरकार के किसान कल्याण के दावे कितने खोखले हैं।
कर्ज के बोझ तले दबे किसान
दरअसल लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि देशभर के किसानों पर वाणिज्यिक, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों का कुल कर्ज करीब 32.65 लाख करोड़ रुपये है। आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में 1.70 लाख करोड़ रुपये, राजस्थान में किसानों पर लगभग 1.92 लाख करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ में करीब 32 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केंद्र स्तर पर किसान कर्ज माफी की कोई योजना प्रस्तावित नहीं है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
इसे लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। उमंग सिंघार ने कहा कि देश का पेट भरने वाला अन्नदाता आज खुद अपने परिवार, खेती और भविष्य को संभालने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं के समाधान के बजाय सरकार सिर्फ घोषणाओं और प्रचार तक सीमित है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कर्ज की स्थिति बताती है कि किसानों के हितों की बात करने वाली नीतियां जमीनी स्तर पर असरदार साबित नहीं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि “यही है भाजपा का तथाकथित किसान-हितैषी मॉडल राहत नहीं, सिर्फ आश्वासन। समाधान नहीं, सिर्फ प्रचार”। उमंग सिंघार ने कहा कि यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं बल्कि किसानों की टूटती कमर, बढ़ता आर्थिक दबाव और मजबूरी में उठते आत्महत्या जैसे कदमों की सच्चाई है। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि वो कर्ज में डूबे किसानों को ठोस राहत कब देगी।