नगर पालिका में काम नहीं हो रहा तो जिम्मेदार कौन? सिर्फ अधिकारी या अध्यक्ष और पार्षद भी?

मध्य प्रदेश के शहरों में बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि इसकी जिम्मेदारी किसकी है। सड़कें टूटी हों, नालियां जाम हों, कचरा प्रबंधन में कमी हो या स्ट्रीट लाइट बंद हों, आम नागरिक के मन में यह सवाल आता है कि क्या केवल नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी ही

Jun 27, 2026 - 23:30
नगर पालिका में काम नहीं हो रहा तो जिम्मेदार कौन? सिर्फ अधिकारी या अध्यक्ष और पार्षद भी?

मध्य प्रदेश के शहरों में बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि इसकी जिम्मेदारी किसकी है। सड़कें टूटी हों, नालियां जाम हों, कचरा प्रबंधन में कमी हो या स्ट्रीट लाइट बंद हों, आम नागरिक के मन में यह सवाल आता है कि क्या केवल नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी ही जिम्मेदार हैं या जनता द्वारा चुने गए अध्यक्ष और पार्षद भी?

इस सवाल का जवाब केवल राजनीति में नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 और उसके तहत बने नियमों में मिलता है। कानून नगर पालिका की व्यवस्था को दो हिस्सों में बांटता है। पहला, निर्वाचित परिषद, जिसमें अध्यक्ष और पार्षद शामिल होते हैं। दूसरा, प्रशासनिक तंत्र, जिसमें मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) और अन्य अधिकारी-कर्मचारी होते हैं। दोनों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं, लेकिन शहर के विकास की जिम्मेदारी दोनों की होती है।

अध्यक्ष और पार्षद का काम क्या है?

नगर पालिका अध्यक्ष का पद सिर्फ औपचारिक नहीं होता। वह परिषद का प्रमुख होता है और बैठकों की अध्यक्षता करता है। विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करना, अलग-अलग विषयों पर फैसले लेना, बजट को मंजूरी देना, प्रशासन के कामकाज की समीक्षा करना और अधिकारियों से जवाब मांगना उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। अगर शहर में लंबे समय तक बुनियादी सुविधाएं खराब रहती हैं, तो जनता अध्यक्ष से सवाल पूछ सकती है। वर्ष 1998 के नियमों में भी अध्यक्ष-इन-काउंसिल और अलग-अलग प्राधिकारियों के काम साफ तौर पर बताए गए हैं।

इसी तरह पार्षद अपने-अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे अपने वार्ड की समस्याएं परिषद के सामने रखते हैं, विकास कार्यों के प्रस्ताव देते हैं, बजट पर चर्चा करते हैं और यह कोशिश करते हैं कि उनके क्षेत्र की समस्याओं का समाधान हो। इसलिए वार्ड स्तर की समस्याओं पर पार्षद की भी राजनीतिक जिम्मेदारी बनती है।

अधिकारियों का काम क्या है?

मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) और अन्य अधिकारी नगर पालिका का प्रशासन संभालते हैं। परिषद द्वारा लिए गए फैसलों को लागू कराना, कर्मचारियों से काम कराना, निर्माण कार्य करवाना, वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था संभालना तथा कानून के अनुसार नगर पालिका की सेवाएं चलाना उनकी जिम्मेदारी होती है। अगर परिषद ने फैसला ले लिया है और उसके बाद भी काम नहीं हो रहा, तो प्रशासनिक जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी।

किस काम की जिम्मेदारी किसकी? यह भी कानून में साफ है

सफाई व्यवस्था के मामले में अध्यक्ष और पार्षद सफाई व्यवस्था पर नजर रखते हैं, जनता की शिकायतें परिषद में उठाते हैं और जरूरत के अनुसार संसाधन व बजट उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। वहीं अधिकारी सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाते हैं, कचरा उठवाते हैं और नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखते हैं।

स्ट्रीट लाइट के मामले में अध्यक्ष और पार्षद खराब स्ट्रीट लाइट की शिकायतें उठाते हैं, नई स्ट्रीट लाइट लगाने के प्रस्ताव और बजट पर फैसला लेते हैं तथा काम की निगरानी करते हैं। जबकि अधिकारी लाइटों की मरम्मत, नई लाइट लगवाने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी निभाते हैं।

पेयजल व्यवस्था के लिए अध्यक्ष और पार्षद पानी की समस्या के समाधान के लिए योजना और बजट को प्राथमिकता देते हैं तथा जनता की शिकायतें परिषद में उठाते हैं। अधिकारी नियमित पानी की सप्लाई सुनिश्चित करते हैं, पाइपलाइन की मरम्मत कराते हैं तथा पानी की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था का ध्यान रखते हैं।

अतिक्रमण हटाने के मामले में अध्यक्ष और पार्षद अतिक्रमण की शिकायतें उठाते हैं, कार्रवाई के लिए प्रशासन से कहते हैं और सार्वजनिक हित में जरूरी फैसले लेते हैं। अधिकारी नोटिस जारी करते हैं, कानूनी कार्रवाई करते हैं और अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाते हैं।

सड़क और नालियों के निर्माण तथा रखरखाव के लिए अध्यक्ष और पार्षद निर्माण और मरम्मत के प्रस्तावों को मंजूरी देते हैं, बजट उपलब्ध कराते हैं तथा काम की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा करते हैं। अधिकारी टेंडर की प्रक्रिया पूरी करते हैं, निर्माण कार्य कराते हैं तथा गुणवत्ता की जांच और रखरखाव सुनिश्चित करते हैं।

कचरा प्रबंधन के तहत अध्यक्ष और पार्षद व्यवस्था की निगरानी करते हैं और लोगों की शिकायतों का समाधान कराने का प्रयास करते हैं। अधिकारी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, परिवहन और उसके सही निस्तारण की जिम्मेदारी निभाते हैं।

सिर्फ अधिकारियों को दोष देना कितना सही?

यह मानना सही नहीं है कि केवल अधिकारी ही दोषी होते हैं। अगर अधिकारी परिषद के वैध फैसलों को लागू नहीं करते, तो उनकी जिम्मेदारी तय होती है। लेकिन अगर परिषद जरूरी फैसले नहीं लेती, समस्याएं नहीं उठाती या ठीक से निगरानी नहीं करती, तो चुने हुए जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती है। यानी काम कराने की प्रशासनिक जिम्मेदारी अधिकारियों की है, जबकि नेतृत्व देना, नीति तय करना, प्राथमिकताएं तय करना और जनता के प्रति जवाबदेह रहना अध्यक्ष और पार्षद की भी जिम्मेदारी है।

कानून क्या कहता है?

मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 के अनुसार नगर पालिका का संचालन निर्वाचित परिषद और प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त ढांचे पर होता है। वहीं वर्ष 1998 के नियमों में अध्यक्ष-इन-काउंसिल, मुख्य नगर पालिका अधिकारी और अन्य प्राधिकारियों के कामों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसलिए नगर पालिका की सफलता या विफलता का श्रेय या जिम्मेदारी केवल किसी एक पक्ष पर नहीं डाली जा सकती।

निष्कर्ष के तौर पर, जब भी शहर में सफाई नहीं होती, स्ट्रीट लाइट बंद रहती हैं, पानी की समस्या बनी रहती है, सड़कें खराब होती हैं या अतिक्रमण नहीं हटता, तो जनता को केवल अधिकारियों से ही नहीं, बल्कि अपने चुने हुए पार्षद और अध्यक्ष से भी जवाब मांगना चाहिए। लोकतंत्र में अधिकारी प्रशासन चलाते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि जनता के प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए विकास की सबसे बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी उन्हीं की होती है, जबकि प्रशासनिक जिम्मेदारी अधिकारियों की। शहर तभी बेहतर चलेगा, जब दोनों अपनी-अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएंगे।