नीट यूजी 2026 पेपर लीक केस: CBI ने संभाला जांच का मोर्चा, दर्ज की FIR, जानें पूरा मामला

देशभर के लाखों मेडिकल आकांक्षी छात्रों के भविष्य से जुड़े बहुचर्चित नीट यूजी 2026 परीक्षा विवाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अब अपनी जांच का मोर्चा संभाल लिया है। परीक्षा में कथित पेपर लीक और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोपों के बाद मचे बवाल के बीच, मंगलवार को सीबीआई ने इस मामले में

May 12, 2026 - 21:30
नीट यूजी 2026 पेपर लीक केस: CBI ने संभाला जांच का मोर्चा, दर्ज की FIR, जानें पूरा मामला

देशभर के लाखों मेडिकल आकांक्षी छात्रों के भविष्य से जुड़े बहुचर्चित नीट यूजी 2026 परीक्षा विवाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अब अपनी जांच का मोर्चा संभाल लिया है। परीक्षा में कथित पेपर लीक और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोपों के बाद मचे बवाल के बीच, मंगलवार को सीबीआई ने इस मामले में औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर ली है।

यह एफआईआर 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) से संबंधित है, जिसका आयोजन देश के मेडिकल कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाता है। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद सरकार ने परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया था, जिससे लाखों छात्रों में निराशा और अनिश्चितता का माहौल बन गया।

केंद्र सरकार ने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए, मामले की व्यापक और गहन जांच की जिम्मेदारी शीर्ष केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को सौंपने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह कदम देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं में से एक की शुचिता बनाए रखने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और भविष्य में ऐसे कदाचार को रोकने के लिए एक कड़ा संदेश भी है।

परीक्षा संपन्न होने के चार दिन बाद मिली जानकारी

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए), जो इस परीक्षा का आयोजन करती है, के आधिकारिक बयानों के अनुसार, 3 मई को परीक्षा संपन्न होने के चार दिन बाद, यानी 7 मई की शाम को कथित गड़बड़ियों से जुड़े प्रारंभिक इनपुट प्राप्त हुए थे। इसके उपरांत, 8 मई की सुबह बिना किसी देरी के, इस पूरे मामले को स्वतंत्र जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को अग्रसारित कर दिया गया था, ताकि किसी भी प्रकार की लीपापोती से बचा जा सके और सच्चाई सामने आ सके।

सीबीआई ने किस आधार पर दर्ज की FIR

सीबीआई ने अपनी जांच का आधार शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त एक विस्तृत लिखित शिकायत को बनाया है। इसी शिकायत के आधार पर एजेंसी ने विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई गंभीर धाराएं शामिल हैं, जिनमें आपराधिक साजिश रचना, धोखाधड़ी करना, आपराधिक विश्वासघात, परीक्षा सामग्री की चोरी और महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट करना जैसे अपराध शामिल हैं। इनके अतिरिक्त, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 की धाराएं भी इस मामले में जोड़ी गई हैं, जो कदाचार को रोकने और दोषियों को दंडित करने के लिए बनाए गए हैं।

जांच के लिए CBI ने विशेष टीमों का किया जिक्र

इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए सीबीआई ने विशेष टीमों का गठन किया है। ये टीमें देश के विभिन्न संभावित स्थानों पर भेज दी गई हैं, जहां से पेपर लीक नेटवर्क के संचालित होने या अनियमितताओं के तार जुड़े होने की आशंका है। एजेंसी का मुख्य ध्यान अब कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने, इसमें शामिल आर्थिक लेनदेन की जांच करने और इस पूरे षड्यंत्र से जुड़े सभी व्यक्तियों की भूमिका का गहनता से विश्लेषण करने पर केंद्रित होगा, ताकि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके।

एनटीए ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्रीय एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं से प्राप्त विस्तृत इनपुट तथा उनकी जांच रिपोर्टों के आधार पर ही भारत सरकार की उच्च स्तरीय मंजूरी के बाद 3 मई 2026 को आयोजित नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने और इसे दोबारा आयोजित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह निर्णय लाखों छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के उद्देश्य से लिया गया है। नई परीक्षा तिथियों की घोषणा एनटीए द्वारा जल्द ही की जाएगी, जिसके लिए अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

गौरतलब है कि इस परीक्षा का आयोजन भारत के 551 शहरों के साथ-साथ विदेश के 14 शहरों में भी किया गया था। इसमें देश-विदेश से लगभग 23 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था, जो इसकी व्यापकता और महत्व को दर्शाता है। इस बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता ने न केवल छात्रों के मनोबल को तोड़ा है, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं।