सरहद पार जल-प्रलय का खौफनाक मंजर: पवित्र गोसाईं कुंड से नारायणी तक महाविनाश, भारत के तटों पर तैरते मिले शव
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जल-प्रलय का दर्द अब भारत के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच गया है। नारायणी और गंडक नदी की तेज लहरों के साथ महराजगंज और कुशीनगर में कई शव व बिखरा हुआ घरेलू सामान बहकर आ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में दहशत का माहौल है।
Kathmandu: हिमालय की गोद में बसे नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा ने ऐसी त्रासदी रचाई है, जिसकी भयावहता का अंदाजा भारत के सीमावर्ती जिलों में साफ देखा जा सकता है। नेपाल की नदियों में आया सैलाब अब सरहद पार कर उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर तक तबाही के निशान छोड़ रहा है। नारायणी और गंडक नदी की लहरें अपने साथ सिर्फ मलबा ही नहीं, बल्कि बहे हुए लोगों के शव और उजड़े आशियानों का सामान लेकर आ रही हैं।
नदी किनारे पसरा सन्नाटा, लहरों के साथ मिले शव
महराजगंज और कुशीनगर के तटीय गांवों में इस समय भारी सन्नाटा और दहशत का माहौल है। नदी किनारे मिले कई शवों को देखकर ग्रामीणों के रोंगटे खड़े हो गए। स्थानीय प्रशासन, एसएसबी और एसडीआरएफ की टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए शवों को पानी से बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर रखा। इस संबंध में नेपाल प्रशासन को तुरंत सूचित कर दिया गया है, ताकि शवों को परिजनों को सौंपा जा सके।
बहाव में बहे हंसते-खेलते परिवार, गंडक तट पर मिला सामान
गंडक नदी के किनारे बिखरी अलमारियां, गैस सिलेंडर, टायर और घरेलू सामान उस तबाही की कहानी बयां कर रहे हैं, जिसने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। कुछ ही समय पहले जिन घरों में बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, उनका सारा सामान आज सैकड़ों किलोमीटर दूर नदी तट पर बिखरा पड़ा है। ग्रामीण इन बहकर आई लकड़ियों और सामान को देखकर स्तब्ध हैं।
पवित्र गोसाईं कुंड से सेना के कैंप तक महाविनाश
बाढ़ का सबसे विकराल रूप रसुवा और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। पौराणिक मान्यता वाले गोसाईं कुंड की ओर गए सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक इस आपदा में फंस गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 450 से अधिक विदेशी सैलानियों के अलावा वहां तैनात नेपाल पुलिस, सेना और सशस्त्र प्रहरी बल के करीब 89 जवान भी पानी के तेज बहाव में बह गए हैं। कई गांव पूरी तरह नक्शे से मिट चुके हैं।