आरक्षण को लेकर OBC महासभा का भोपाल में उग्र प्रदर्शन, बैरिकेड्स पर चढ़े प्रदर्शनकारी, पुलिस ने वाटर कैनन से रोका

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 13 प्रतिशत पदों पर लगे होल्ड को तत्काल हटाने की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया। ओबीसी महासभा के सदस्यों ने विधानसभा का घेराव करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रंगमहल चौराहे

Jul 20, 2026 - 15:30
आरक्षण को लेकर OBC महासभा का भोपाल में उग्र प्रदर्शन, बैरिकेड्स पर चढ़े प्रदर्शनकारी, पुलिस ने वाटर कैनन से रोका

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 13 प्रतिशत पदों पर लगे होल्ड को तत्काल हटाने की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया। ओबीसी महासभा के सदस्यों ने विधानसभा का घेराव करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रंगमहल चौराहे पर लगे बैरिकेड्स पर रोक दिया। प्रदर्शनकारियों द्वारा इन अवरोधकों पर चढ़ने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का उपयोग किया। हालांकि, इस दौरान वाटर कैनन में तकनीकी खराबी आ गई और उससे धुआं निकलने लगा, जिसके बाद मौके पर ही उसकी मरम्मत का काम जारी रहा।

ओबीसी महासभा के प्रमुख चेहरों में जीतू लोधी, विश्वजीत रतौनिया और अधिवक्ता धर्मेंद्र कुशवाह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ओबीसी वर्ग के युवा कड़ी मेहनत से प्रतियोगी परीक्षाओं को पास कर रहे हैं, लेकिन नौकरी का इंतजार करते हुए वे अपनी उम्र की सीमा पार कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से तत्काल मध्य प्रदेश में 13 प्रतिशत पदों पर लगे होल्ड को हटाने और ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ देने की मांग की। प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए और ‘मोहन सरकार होश में आओ’ जैसे नारे लगाते हुए अपनी मांगों को बुलंद किया।

आरक्षण पर लागू 13 प्रतिशत होल्ड हटाने की प्रमुख मांग

ओबीसी महासभा का कहना है कि प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाएं तो 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर आयोजित की जाती हैं और मेरिट सूची भी इसी आधार पर तैयार होती है। इसके विपरीत, नियुक्तियां केवल 14 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर दी जा रही हैं, जिससे ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनकी प्रमुख मांग है कि आरक्षण पर लागू 13 प्रतिशत होल्ड को बिना किसी देरी के हटाया जाए।

8 वर्षों से जारी संघर्ष, 5 बार मुख्यमंत्री का घेराव

महासभा के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि वे पिछले आठ वर्षों से इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने पांच बार मुख्यमंत्री का घेराव किया है और सैकड़ों सभाएं, धरने तथा आंदोलन भी आयोजित किए हैं। इसके बावजूद सरकार ने अब तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है, जिससे वर्ग में गहरा असंतोष व्याप्त है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे विधानसभा का घेराव करने के अपने इरादे को और मजबूत करेंगे और आंदोलन को और भी उग्र रूप देंगे।

न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा

ओबीसी महासभा कोर कमेटी के सदस्य महेंद्र सिंह लोधी ने 13 प्रतिशत आरक्षण होल्ड को ओबीसी वर्ग के युवाओं के लिए एक बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि उनका यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता और 13 प्रतिशत आरक्षण होल्ड को जारी नहीं कर दिया जाता। लोधी ने यह भी बताया कि इस होल्ड के कारण ओबीसी के वे बच्चे भी नियुक्ति से वंचित हो रहे हैं, जो सामान्य वर्ग से अधिक अंक प्राप्त कर रहे हैं।

कोर कमेटी ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव लोकेंद्र गुर्जर ने मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें ओबीसी मुख्यमंत्री नहीं चाहिए, क्योंकि ओबीसी मुख्यमंत्री होने से क्या होता है जब वह अपने वर्ग के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। गुर्जर ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बच्चे, जो अच्छी-अच्छी परीक्षाओं को पास कर चुके हैं, आज भी घर पर बैठे हैं। ऐसे मुख्यमंत्री का क्या उपयोग, जो ओबीसी वर्ग के लिए कुछ कर ही नहीं रहा है।

सपा प्रदेश अध्यक्ष भी प्रदर्शन में शामिल

समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने मोहन यादव सरकार पर हमला बोला। यादव ने कहा कि यदि मोहन यादव को आरक्षण देना होता तो वे बहुत पहले ही दे चुके होते। उन्होंने डंके की चोट पर आरक्षण देने की बात कही थी, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ओबीसी हैं। सपा प्रदेश अध्यक्ष ने वादा किया कि यदि उनकी सरकार आती है तो वे 27 प्रतिशत सहित कुल 52 प्रतिशत आरक्षण देंगे।

छतरपुर से ओबीसी महासभा की जिलाध्यक्ष राजलक्ष्मी कुशवाहा ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उनकी मांगें पूरी नहीं कर सकते तो चूड़ी पहन लें। उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए चूड़ी भेंट के रूप में लाई थीं, जो उनके विरोध का एक प्रतीकात्मक तरीका था। पूरे प्रदर्शन के दौरान, प्रशासन और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

 

 

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।